सक्ती

हरी खाद के प्रति किसानों में बढ़ रही जागरूकता, कृषि विभाग कर रहा सतत मार्गदर्शन

हरी खाद अपनाओ, लागत घटाओ और मिट्टी बचाओ अभियान की पहल को मिल रहा किसानों का बेहतर प्रतिसाद

सक्ती – रासायनिक खाद की बढ़ती कीमत और मिट्टी की घटती उर्वरा शक्ति को देखते हुए कृषि विभाग जिला सक्ती द्वारा जिले में “हरी खाद अपनाओ, लागत घटाओ, मिट्टी बचाओ” अभियान के तहत फसल प्रदर्शन का आयोजन किया गया। खरीफ मौसम 2026 के अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा संतुलित उर्वरक उपयोग को बढ़ावा देने तथा किसानों को हरी खाद के उपयोग के लिए प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मूंग एवं ढैंचा बीज का वितरण किया गया। जिले के सभी विकासखंडों सक्ती, मालखरौदा, डभरा एवं जैजैपुर में ग्रामों का चयन कर लक्ष्य के अनुरूप बीज का शत-प्रतिशत वितरण सुनिश्चित किया गया। जिले में विभागीय योजना मंडी निधि एवं कृषक समग्र विकास योजना अंतर्गत कुल 344 किसानों को 50 प्रतिशत अनुदान पर मूंग एवं ढैंचा बीज उपलब्ध कराया गया। कृषि विभाग के मैदानी अमलों द्वारा किसानों को लगातार मार्गदर्शन भी दिया जा रहा है। कृषि विभाग ने बताया कि बुवाई के 45 से 50 दिन बाद मूंग एवं ढैंचा की फसल को खेत में मिलाकर सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है, जिससे मिट्टी में पोषक तत्वों की मात्रा बढ़ती है तथा मिट्टी की भौतिक संरचना में सुधार होता है। साथ ही यह जैविक कार्बन एवं नाइट्रोजन की मात्रा बढ़ाने में भी सहायक है, जिससे भूमि की उर्वरा शक्ति में सुधार होता है, रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होती है तथा आगामी फसलों की बेहतर वृद्धि और उत्पादन में सहायता मिलती है। खेत में मिट्टी पलटने पर ढैंचा से लगभग 80 से 100 किलोग्राम नाइट्रोजन, 15 से 20 किलोग्राम फास्फोरस तथा 40 से 50 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर उपलब्ध होता है। इसी प्रकार मूंग से लगभग 40 से 60 किलोग्राम नाइट्रोजन, 10 से 15 किलोग्राम फास्फोरस तथा 20 से 30 किलोग्राम पोटाश प्रति हेक्टेयर पोषक तत्व प्राप्त होते हैं। यही कारण है कि हरी खाद को प्राकृतिक उर्वरक माना जाता है। यह केवल एनपीके तत्वों की पूर्ति ही नहीं करती, बल्कि जैविक कार्बन बढ़ाकर मिट्टी की संरचना, जल धारण क्षमता तथा सूक्ष्मजीवों की सक्रियता में भी सुधार करती है। उप संचालक कृषि, जिला सक्ती ने बताया कि विभाग द्वारा किसानों को हरी खाद के लाभों के संबंध में लगातार जागरूक किया जा रहा है। समय पर बीज उपलब्ध कराने एवं प्रभावी वितरण व्यवस्था के कारण किसानों ने उत्साहपूर्वक योजना का लाभ लिया है। यह पहल प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने तथा मृदा स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।