सक्ती

NHRSJC द्वारा वर्ल्ड जुनोसिस डे पर अवेयरनेस की पहल

जूनोटिक डिसीज़ से आज 60% इंसान प्रभावित

सक्ती-  जानवरों से इंसानों में फैलने वाले रोगों को ज़ूनोटिक रोग (Zoonotic Diseases) कहते हैं तथा इंसान में लगभग 60% से अधिक संक्रामक बीमारियाँ जानवरों से ही फैलती हैं, यह बात बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग (विधि) के प्रदेश अध्यक्ष चितरंजय पटेल विश्व जूनोसिस दिवस पर अवेयरनेस  कार्यक्रम के तहत कहा कि ये वायरस, बैक्टीरिया या परजीवियों (parasites) के कारण हो सकते हैं तो वहीं जूनोटिक बीमारी पशुओं के  सीधे संपर्क एवं दूषित भोजन या मच्छरों/ कीटों के काटने से फैल सकते हैं।
इस संबंध में NRSJC मेडिकल सेल के प्रदेश सचिव डॉ योगेश पटेल ने बताया कि जानवरों से फैलने वाले रोग में रेबीज (Rabies) सबसे आम और घातक जूनोटिक बीमारी है, जो संक्रमित कुत्ते, बिल्ली या बंदर के काटने या खरोंचने से सीधे नसों पर हमला करती है तो वहीं बर्ड फ्लू (Bird Flu) और स्वाइन फ्लू (Swine Flu) वायरस जनित बीमारियाँ हैं जो मुख्य रूप से पक्षियों (मुर्गी, बत्तख) और सुअरों के संपर्क में आने से तेजी से फैलती हैं तथा निपाह वायरस (Nipah Virus): चमगादड़ों (fruit bats) और सुअरों से इंसानों में फैलने वाला यह एक बहुत खतरनाक वायरस है। इसके अलावा टैक्सोप्लाज़मोसिज़ (Toxoplasmosi) बिल्लियों के मल और दूषित मिट्टी के माध्यम से फैलने वाला एक परजीवी संक्रमण है तो वहीं लेप्टोस्पायरोसिस (Leptospirosis): संक्रमित जानवरों के मूत्र से दूषित हुए पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से यह बैक्टीरिया फैलता है।उन्होंने इस संबंध में बचाव के प्रमुख उपाय टीकाकरण को बताते हुए कहा कि अपने पालतू जानवरों का नियमित टीकाकरण अवश्य करवाएं तथा किसी भी जानवर के काटने या खरोंचने पर घाव को साबुन से धोएं और तुरंत चिकित्सा सहायता लें।साथ ही दूध को हमेशा उबालकर पिएं और मांसाहारी भोजन को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं और  जानवरों को छूने या उनके रहवास की सफाई करने के बाद हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं। NHRSJC के जिलाध्यक्ष महेंद्र बरेठ ने जुनोसिस डे पर लोगों पशु जनित बीमारियों के प्रति लोगों को आगाह करते हुए कहा कि निश्चित रूप से हम अवेयरनेस के माध्यम से टीकाकरण और सुरक्षा निर्देशों का पालन करते हुए जूनोटिक डिसीस के संक्रमण से बच सकते हैं।