भागवत कथा के चौथे दिन कृष्ण जन्म की कथा भक्तगणों को श्रवण कराते हुए कहा धरती पर बढ़ते हैं अत्याचार तब तब लेते हैं भगवान अवतार – आचार्य राजेंद्र शर्मा


सक्ती – ग्राम अहिल्दा में आयोजित संगीतमय श्रीमद भागवत कथा के चौथे दिन आचार्य राजेंद्र महाराज द्वारा श्री कृष्ण प्राकट्य महोत्सव का सरस वर्णन कराते हुए भक्तगणों को बताया गया, भागवत एक आध्यात्म दीप है, भगवत प्राप्ति की पहली सीढ़ी सत्संग है । सत्संग से विवेक जागृत होता है और । मनुष्य ईश्वर के प्रति आस्था वान बनकर , अपने घर परिवार के साथ समाज में भी यश प्राप्त करता है । जब जब धरती पर धर्म को हानि होती है , और सनातन पर आघात होता है , तब भगवान का अवतार होता ही । संसार के समस्त प्राणी अपने-अपने कर्मों के कारण धरती में अलग-अलग योनियों में जन्म प्राप्त करते हैं किंतु मनुष्य योनि में जन्म प्राप्त करना यह अर्जित पुण्य का ही परिणाम है । इसी जन्म में ही सद्गति और मुक्ति की कामना पूरी हो सकती है तथा भावी जन्म हम सुधर सकते हैं । भगवान का अवतार तो संपूर्ण प्राणियों के कल्याण हेतु करुणावश ही होता है ।२८ वे द्वापर में भगवान श्री नारायण ही २० वा अवतार लेकर श्री कृष्ण बने थे । भगवान श्री कृष्ण अनंत ऐश्वर्यवान , जगतगुरू एवं क्रांतिकारी देवता है । श्री कृष्ण का अवतार केवल दानव और राक्षसों का वध करने के लिए ही नहीं अपितु धर्म की स्थापना और संपूर्ण जगत का कल्याण है । भगवान श्री कृष्ण ने जल , फल और थल इन तीनों को मुक्त करने का संकल्प लेकर अपनी दिव्य लीला किए । यमुना नदी के कालिदाह से सौ फन वाले कलियां नाग को रमणक द्वीप सर्पों का स्थान भेजकर यमुना को विष । अर्थात प्रदूषण से मुक्त किया । ताल वन जहां हजारों । फलों के वृक्ष थे किंतु धेनुकासुर नाम के दानव ने अपने अधीन कर लिया था । ब्रजवासी फल छू भी नहीं सकते थे । बलराम जी के द्वारा इस दानव का वध करवा कर लाल वन को भी मुक्त किया अर्थात वन संपदा की रक्षा की ।
भौमासुर संपूर्ण धरती पर अपना अधिकार करते हुए हर राजाओं से युद्ध कर उनकी राज कन्याओं को बंधक बना लिया था तब भगवान श्री कृष्ण । भौमासुर । की राजधानी पराग ज्योतिषपुर में युद्ध कर भौमासुर का वध कर सभी । राजकुमारी एवं भूमि को भी मुक्त किया ।
आचार्य द्वारा वामन अवतार की कथा प्रसंग का वर्णन कर बताया गया कि सर्वस्व समर्पण का भाव रखने पर । परमात्मा भी दानदाता के कर्जदार अर्थात ऋणी बन जाते हैं । राजा बलि ने तीन पेग वामन भगवान को दान में देकर अपना सर्वस्व निक्षावार कर दिया इस महत्वपूर्ण दान की महिमा का यश गान करते हुए देवताओं ने राजा बलि की प्रशंसा भी किया और जय जयकार किया । भगवान ने राजा बलि को हमेशा के लिए चिरंजीवी बनाते हुए पल प्रतिपल रक्षा करते रहने का वचन भी दिया और कहा कि आठवीं मन्वंतर में इंद्र भी बनोगे ।आचार्य द्वारा नवम स्कंध में श्री राम चरित्र का वर्णन कर आग्रह किया गया कि श्री राम को जानने से ज्यादा जरूरी है कि हम श्री राम की माने तो मनुष्य जीवन राम नाम से अनुप्राणित होगा और एक आदर्श व्यक्ति तथा समाज का भी निर्माण हो सकेगा ।
चौथे दिन की कथा श्रवण करने पूर्व विधायक शकुंतला साहू , कमला साहू , कमलेश्वरी साहू परी साहू , फूल सायं साहू , कमलेश कुमार साहू , नंदनी दिलेश साहू , एवं सैकड़ो श्रोता उपस्थित थे ।
श्रीमद् भागवत कथा के आयोजन संतोषी-राम प्रसाद साहू द्वारा अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण करने की अपील की गई है ।


