सक्ती

मोदी सरकार देगी छोटे कारोबारियों को राहत-छोटे करदाताओं के लिए नियमों का पालन आसान बनाएगा नया आईटी अधिनियम

सक्ती- केंद्र की मोदी सरकार की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि नए आयकर अधिनियम, 2025 में अनुमानित कराधान का दायरा बढ़ने की वजह से छोटे कारोबारियों और पेशेवरों को बड़ी राहत मिलेगी। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि नए फ्रेमवर्क के तहत मुकदमों की संख्या में कमी आएगी।देशव्यापी जागरूकता अभियान ‘प्रारंभ 2026’ की शुरुआत के मौके पर बोलते हुए सीतारमण ने कहा कि भारत के छोटे कारोबारी और पेशेवर हमारी अर्थव्यवस्था के इंजन हैं। उन्होंने बताया कि नए अधिनियम के तहत कुछ शर्तों के साथ 10 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यवसायों को विस्तृत बही-खाते रखने और ऑडिट करवाने से छूट मिलेगी। उन्होंने कहा, ‘इससे बड़ी राहत मिलेगी।’ उन्होंने यह भी कहा कि आवास ऋण पर निर्माण के पहले ब्याज जैसे मसले नए कानून में साफ कर दिए गए हैं, जो पहले विवाद का विषय थे। मंत्री ने कहा कि नए अधिनियम से निश्चित रूप से मुकदमों में कमी आने की संभावना है। उन्होंने कहा, ‘ट्रिब्यूनल में जाने वाला हर मामला हमारी तरफ से – एक विफलता है।’ उन्होंने कहा कि नया कानून त्रुटियों, विवादों और अनुपालन लागत में कमी करने के हिसाब से तैयार किया गया है और इसमें व्यवहार ‘भ्रम -से अनुपालन की ओर’ बढ़ेगा।
मोदी सरकार की वित्त मंत्रीनिर्मला सीतारमण ने कहा कि इस अधिनियम से व्याख्या की जरूरत और न्यायालय के हस्तक्षेप में भी कमी आएगी।क्योंकि इसमेंप्रावधान कम विरोधाभासी और समझने में आसान हैं।इसके साथ ही सरकार ने आयकर वेबसाइट 2.0 और एक राष्ट्रव्यापी जनसंपर्क अभियान भी शुरू किया है सीतारमण ने कहा कि डिजिटलप्लेटफॉर्म इसलिए बनाए गए हैं ताकि करदाता ‘सवाल पूछ सकें, संपर्क कर सकें और फाइल कर सकें’, वहीं अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे बड़े शहरों से बाहर निकलकर छात्रों सहित समाज के अलग-अलग वर्गों से जुड़ें। उन्होंने कहा, ‘आप सिर्फ कानून ही नहीं बना रहे हैं, आप कर देने वालों के साथ सरकार के रिश्ते का चेहरा हैं।’ मंत्री ने कहा कि नया कानून आयकर अधिनियम, 1961 की जगह लेगा, जो दशकों में 4,000 से ज्यादा संशोधनों के बाद काफी जटिल हो गया था

नए अधिनियम के तहत कुछ शर्तों के साथ 10 करोड़ रुपये तक का कारोबार करने वाले व्यवसायों को विस्तृत बही-खाते रखने और ऑडिट करवाने से छूट मिलेगी। इससे बड़ी राहत मिलेगी। नए अधिनियम से निश्चित रूप से मुकदमों में कमी आने की संभावना है। वित्त मंत्री ने कहा कि नए अधिनियम में धाराओं की संख्या 819 से घटकर 536, अध्यायों की संख्या 47 से घटकर 23 और शब्दों की संख्या 5.12 लाख से घटकर करीब 2.6 लाख रह गई है। इसमें पहले के वर्ष और आकलन वर्ष के बीच भेद खत्म कर दिया गया है और इसकी जगह एकल कर वर्ष पेश किया गया है।उन्होंने कहा, ‘जब आप लोगों को सरलता प्रदान करते हैं तो लोग उसे अपना लेते हैं।’यह कानून लगभग 6 महीनों में तैयार किया गया था। इसे तैयार करने में लगभग 7,000 घंटे लगे और संसद की एक प्रवर समिति द्वारा इसकी जांच की गई।