सक्ती

जिस धरती पर माता शबरी ने भगवान श्रीराम को प्रेम के बेर खिलाए थे, उसी शिवरीनारायण के बेर से एक दिन पूरे भारत का बैर मिटेगा – सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज

जिस धरती पर माता शबरी ने भगवान श्रीराम को प्रेम के बेर खिलाए थे, उसी शिवरीनारायण के बेर से एक दिन पूरे भारत का बैर मिटेगा - सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज kshititech

सक्ती –  परम पूज्य सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने शिवरीनारायण धाम में मीडिया से चर्चा करते हुए सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता, जातिवाद, नदी संरक्षण तथा क्षेत्र के आध्यात्मिक विकास को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया। गुरुदेव ने कहा कि जिस पावन धरती पर माता शबरी ने भगवान श्रीराम को प्रेम और भक्ति से बेर खिलाए थे, उसी शिवरीनारायण की भूमि से एक दिन पूरे भारत में जातिगत बैर मिटाने और सामाजिक समरसता स्थापित करने का दिव्य संदेश जाएगा। सद्गुरु ने कहा कि प्रयागराज की तरह शिवरीनारायण भी संगम की पवित्र भूमि है। भारत की सभी नदियाँ गंगा, यमुना और नर्मदा की भाँति पूजनीय हैं। उन्होंने शिवरीनारायण में निरंतर नदी आरती आयोजित करने वाले आयोजकों एवं स्थानीय नागरिकों के प्रयासों की सराहना की।
नदी को सुरक्षित रखना ही उसकी सबसे बड़ी आरती
सद्गुरु जी ने कहा, “सबसे बड़ी आरती यही है कि नदी सुरक्षित हो, कल-कल निनाद करती हुई बहे।”उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल नदी की पूजा पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे प्रदूषण से बचाना भी हमारा कर्तव्य है। जल ही जीवन की आधारशिला है। यदि नदियाँ सुरक्षित और प्रदूषण मुक्त रहेंगी, तभी मानव जीवन सुखी एवं आनंदमय हो सकेगा।सद्गुरु जी ने स्मरण कराया कि वर्षों पहले जब वे शिवरीनारायण आए थे, तब यह क्षेत्र अपेक्षाकृत उपेक्षित दिखाई देता था। उन्होंने उस समय स्थानीय जनप्रतिनिधियों को नदी आरती प्रारंभ करने का सुझाव दिया था, जिससे क्षेत्र की सांस्कृतिक चेतना के साथ सुख-समृद्धि भी बढ़े। आज नियमित आरती की व्यवस्था देखकर उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की और आयोजकों, जनप्रतिनिधियों तथा जनता को शुभाशीष दिया।
शबरी के बेर ने जातिवाद पर प्रहार किया था
सामाजिक समरसता पर सद्गुरु ने अत्यंत प्रभावशाली संदेश देते हुए कहा कि माता शबरी और भगवान श्रीराम का प्रसंग जातिगत भेदभाव के विरुद्ध सनातन संस्कृति का महत्वपूर्ण आदर्श है। उन्होंने कहा, “शबरी के बेर ने उस समय जातिवाद के ऊपर प्रहार किया था। सद्गुरु ने वर्तमान समाज में बढ़ते जातिगत विभाजन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान श्रीराम द्वारा माता शबरी के बेर स्वीकार करने का प्रसंग हमें प्रेम, भक्ति, समानता और सामाजिक एकता का संदेश देता है। आज उसी भावना को पुनः जाग्रत करने की आवश्यकता है।
शिवरीनारायण क्षेत्र में बनेगा माँ शबरी का विराट मंदिर
सद्गुरु श्री ऋतेश्वर जी महाराज ने शिवरीनारायण के व्यापक आध्यात्मिक विकास की परिकल्पना रखते हुए कहा कि वे शिवरीनारायण, खरौद और आसपास की लगभग 20–25 पंचायतों को एक साझा सांस्कृतिक क्षेत्र के रूप में देखते हैं।उन्होंने भविष्य में इस क्षेत्र में माता शबरी का विराट मंदिर स्थापित होने की बात कही.सद्गुरु जी ने विश्वास व्यक्त किया कि माता शबरी की यह पवित्र भूमि भारत में जातिगत बैर और सामाजिक विभाजन को दूर करने की प्रेरणा बनेगी। यहाँ से सनातन समाज की एकता और समरसता का ऐसा संदेश जाएगा, जो संपूर्ण राष्ट्र को जोड़ने का कार्य करेगा।
जातियों का बैर मिटेगा और सनातन संस्कृति का ध्वज लहराएगा
सद्गुरु ने कहा कि शिवरीनारायण की पहचान केवल एक तीर्थस्थल तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यह भूमि राष्ट्रव्यापी सामाजिक समरसता, आध्यात्मिक चेतना और सनातन एकता का केंद्र बन सकती है।उनका संदेश था कि जिस धरती पर भगवान श्रीराम और माता शबरी के प्रेम का आदर्श स्थापित हुआ, उसी धरती से आज जातिगत बैर मिटाने की प्रेरणा मिलनी चाहिए। इस प्रकार सद्गुरु ऋतेश्वर महाराज ने नदी संरक्षण को वास्तविक धार्मिक सेवा तथा माता शबरी की भक्ति को जातिगत भेदभाव से ऊपर उठने का राष्ट्रीय संदेश बताया।