सक्ती

राजस्व, कृषि और सहकारिता विभाग द्वारा शेष एग्रीस्टैक पंजीयन पूर्ण करने चलाया जा रहा विशेष अभियान

पटवारी, आरआई, आरएईओ सहित राजस्व, कृषि और सहकारिता विभाग का मैदानी अमला गाव-गाव अभियान चलाकर मिशन मोड में करेंगे कार्य

सक्ती-  कलेक्टर  जयश्री जैन ने जिले के सभी किसानो का शेष एग्रीस्टैक पंजीयन जल्द से जल्द पूर्ण करने राजस्व, कृषि और सहकारिता विभाग को विशेष अभियान चलाकर मिशन मोड मे कार्य किए जाने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। जिससे जिले के सभी किसानों को शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ सुगमता से मिल सके और निर्धारित समय पर किसान अपने धान आसानी से धान उपार्जन केंद्रो में विक्रय कर सके। कलेक्टर के निर्देशन में पटवारी, आर आई, आरएईओ सहित राजस्व, कृषि और सहकारिता विभाग का मैदानी अमला गाव-गाव अभियान चलाकर एग्रीस्टैक पंजियन कार्य तेजी से पूर्ण करने का कार्य करेंगे। कलेक्टर ने जिले के किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए सभी विभागीय अधिकारियों कर्मचारियों को जमीनी स्तर पर पूरी गंभीरता और मुस्तैदी से कार्य करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने कहा है की किसानो के हित संबंधी कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दास्त नहीं की जायेगी। कृषि विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार सक्ती जिले में अब तक कुल 125577 किसानों का फार्मर आई-डी पंजीयन एवं कुल 506674 कृषि खसरों की एन्ट्री किया जा चुका है।
        कलेक्टर  जैन ने जिले के सभी किसानों से एग्रीस्टैक के तहत फार्मर रजिस्ट्री में अनिवार्य रूप से पंजीयन कराने की अपील की है। उन्होंने जिले के सभी किसानों से अपील किया है कि यदि किसानो ने फार्मर आई-डी नहीं बनवाए है तो जल्द ही पंजीयन करावें एवं जिन किसानों का फार्मर आई-डी बन गया है अपने सभी खसरों का एन्ट्री करावें ताकि धान बेचनें व अन्य विभागीय योजनाओं का लाभ लेने में उन्हे किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना ना करना पड़ें। जिला प्रशासन द्वारा किसानों को डिजिटल पहचान प्रदान करने तथा विभिन्न शासकीय योजनाओं का लाभ सीधे और पारदर्शी तरीके से पहुंचाने के उद्देश्य से एग्रीस्टैक किसान पंजीयन का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
          बता दे की एग्रीस्टैक भारत सरकार की महत्वपूर्ण डिजिटल पहल है, जिसके माध्यम से कृषि एवं किसानों से संबंधित जानकारी का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है। पंजीयन के बाद किसानों के भूमि संबंधी विवरण को डिजिटल रूप से जोड़ा जाएगा, जिससे राजस्व एवं कृषि संबंधी सेवाओं में पारदर्शिता और सुविधा बढ़ेगी।
          एग्रीस्टैक में पंजीयन होने से किसानो को पीएम किसान सम्मान निधि, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना तथा खाद-बीज सहित अन्य विभिन्न योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सुविधा होगी। भूमि विवरण के डिजिटल लिंक होने से भू-अभिलेख संबंधी कार्य भी आसान होंगे। इसके साथ ही भविष्य में कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी सुविधाओं की प्रक्रिया को अधिक सरल एवं त्वरित बनाने में मदद मिलेगी। ई-गिरदावरी एवं फसल संबंधी सटीक जानकारी दर्ज होने से समर्थन मूल्य पर धान और अन्य फसलों के उपार्जन में भी किसानों को सुविधा मिलेगी।
        किसान अपना फार्मर रजिस्ट्री पंजीयन संबंधित क्षेत्र के निकटतम चॉइस सेंटर/लोक सेवा केंद्र अथवा समिति के माध्यम से करा सकते हैं।
          कलेक्टर ने जिले के किसानों से अपील की है कि भविष्य में कृषि एवं राजस्व विभाग की विभिन्न लाभकारी योजनाओं को एग्रीस्टैक आईडी से जोड़े जाने की संभावना को देखते हुए सभी किसान प्राथमिकता के आधार पर अपना पंजीयन अवश्य कराएं, ताकि उन्हें शासकीय योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

1. एग्रीस्टैक पंजीयन कैसे पंजीयन करायें एवं आवश्यक कागजात – किसान को राज्य के एग्रीस्टैक प्लेटफार्म पर स्वंय पंजीयन या नजदीकी CSC के माध्यम से एवं सहकारी समिति से पंजीयन करा सकते है। पजीयन के लिये आधार कार्ड, ई-केवाईसी, आधार कार्ड लिंक मोबाईल नम्बर और बी-1 जैसे दस्तावेजों की आवश्यकता होती है।

2. एग्रीस्टैक पंजीयन की आवश्यकता क्यों – फार्मर आई डी किसान की एक डिजिटल पहचान होगी। यह आधार कार्ड की तरह ही एक विशिष्ट पहचान संख्या होती है, जिसमें किसान का व्यक्तिगत विवरण, उसके बैंक खाते की जानकारी और सबसे महत्वपूर्ण उसका भू-अभिलेख (भुईया पोर्टल के अनुसार भूमि का विवरण) लिंक होता है। भविष्य में सभी विभागीय योजनाओं के लिए अनिवार्य होगा।

3. एग्रीस्टैक पंजीयन के लाभ – एग्रीस्टैक पंजीयन होने पर पीएम किसान, फसल बीमा, धान खरीदी, कृषि अनुदान एवं आपदा राहत जैसी अन्य आवश्यक योजनाओं का लाभ लेने में सुविधा होगी। अलग-अलग कार्यालयों में बार-बार दस्तावेज देनें की आवश्कता कम होगी। भुमि रिकार्ड और किसान की जानकारी डिजिटल रुप से जुडने से योजनाओं का लाभ जल्दी मिल सकेगा।

एग्रीस्टैक फार्मर आई-डी से जुड़ी समस्त जानकारी के लिए क्षेत्रीय ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी व पटवारी एवं कृषि विभाग, राजस्व विभाग व सहकारिता विभाग से सम्पर्क किया जा सकता है।