सावन के महीने में होता है रुद्राभिषेक का अपना महत्व- महामंडलेश्वर अमृतानंद सरस्वती भरत महाराज

पराशक्ति ज्योतिष पीठम में 10 अगस्त को हुआ भव्य रुद्राभिषेक एवं महारास कार्यक्रम का समापन

सक्ती – सक्ती शहर में 3 से 10 अगस्त तक पराशक्ति ज्योतिष पीठम द्वारा भव्य रुद्राभिषेक एवं महारस अभिषेक का कार्यक्रम परम पूज्य महामंडलेश्वर अमृतानंद सरस्वती भरत महाराज के सानिध्य में किया गया था। तथा 3 अगस्त से लेकर 10 अगस्त तक चले इस अभिषेक कार्यक्रम में जहां क्षेत्र सहित दूर दराज अन्य राज्यों से भी पहुंचे श्रद्धालु भक्त जनों ने शिव जी के इस अभिषेक कार्यक्रम में सह परिवार शामिल होकर इस संपन्न कराया तो वहीं अंतिम दिवस आज 10 अगस्त को प्रातः 10 बजे से दोपहर 01 बजे तक यह अभिषेक का कार्यक्रम संपन्न हुआ तथा अभिषेक के पश्चात आरती एवं पूजा अर्चना की गई तत्पश्चात श्रद्धालु भक्त जनों ने महामंडलेश्वर अमृतानंद सरस्वती महाराज से आशीर्वाद एवं प्रसाद ग्रहण किया अभिषेक कार्यक्रम के दौरान संगीत में भजनों के साथ बाबा भोलेनाथ की आराधना की गई तो वहीं श्रावणी मास के पावन मौके पर आयोजित अभिषेक कार्यक्रम में शामिल होने श्रद्धालु भक्तजनों में भी काफी उत्साह देखा गया एवं अंतिम दिवस 10 अगस्त को नगर पालिका परिषद सक्ती के अध्यक्ष श्यामसुंदर अग्रवाल, जिला सराफा एसोसिएशन सक्ती जिले के अध्यक्ष राजेश सराफ, छत्तीसगढ़ चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज बाराद्वार ईकाई के अध्यक्ष योगेश अग्रवाल जग्गू, राउरकेला उड़ीसा से रमेश अग्रवाल, औषधि विक्रेता संघ सक्ती जिले के पदाधिकारी ईश्वर अग्रवाल, शिव बारात आयोजन समिति के संस्थापक रवि शर्मा. चांपा देवांगन, कन्हैया लाल गर्ग (किराना दुकान) सहित काफी संख्या में लोग पहुंचे हुए थे
संगीतमय रुद्राभिषेक कार्यक्रम के दौरान महामंडलेश्वर अमृतानंद सरस्वती भरत महाराज ने भगवान भोलेनाथ को श्रद्धा पूर्वक वंदन करते हुए रुद्राभिषेक के महत्व पर भी प्रकाश डाला उन्होंने बताया कि नर्मदेश्वर शिवलिंग परिवार की सुख, शांति, समृद्धि के लिए होता है। पारदेश्वर शिवलिंग कष्ट मुक्ति आरोग्य प्राप्ति के लिए। पन्नगेश्वर शिवलिंग (पन्ना का शिवलिंग): सभी प्रकार के कल्याण परिवार में सुमति और उन्नति के लिये। श्रीयंत्र से सुशोभित स्फटिक शिवलिंगः व्यापार वृद्धि. धन वृद्धि. कनकधारा एवं सूक्त के द्वारा अभिषेक।मरकत मणि शिवलिंग (शंख सितारा) मंगल. शनि. राहु आदि अरिष्ट ग्रहों के निवारण के लिए होता है एवं महामंडलेश्वर अमृतानन्द सरस्वती (भरत महाराज) ने कहा कि जल से अभिषेकः शांति एवं सभी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए किया जाता है।दूध से अभिषेक : सुख की प्राप्ति संतान प्राप्ति के लिए।-मयु (शहद) धन वृद्धि व वाणी में मधुरता व कष्ट निवारण हेतु ।शर्करा (शक्कर/मिश्री): सुख-साधनों में वृद्धि हेतु।फलों का रस (गन्ने/संतरे का रस) लक्ष्मी प्राप्ति व मनोकामना पूर्ति हेतु गिलोय दूर्वा सर्वोसधी बेलपत्र के रसो से: सभी प्रकार के रोगों के नाश व लंबी आयु के लिए।सुगंधीत तेल आंवला (इत्र से): यश सम्मान कीर्ति एवं पितरों की प्रसन्नता के लिए। कुशोदक जल सेः असाध्य रोगों के लिए किया जाता है। 10 अगस्त को रुद्राभिषेक कार्यक्रम के अंतिम दिवस पंडित बसंत महाराज ने भी रुद्राभिषेक के महत्व पर प्रकाश डाला तथा पराशक्ति ज्योतिष पीठम ने बताया कियदि कोई भी श्रद्धालु भक्तजन किसी विशेष तिथि पर स्वंय के नाम/गोत्र से ऑनलाइन के माध्यम से भी रुद्राअभिषेक करा सकते है। इसके लिए पराशक्ति ज्योतिष पीठम परिवार (बसंत महाराज) । संपर्क सूत्रः 9300108901,9691337878 से संपर्क किया जा सकता है।

