सक्ती मे नशे के सौदागरों पर कार्यवाही

गांजा तस्करी मामले में आरोपी को 4 साल की सजा, 25 हजार रुपये जुर्माना
सक्ती – सक्ती जिले मे मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चल रही कार्यवाही के बीच सक्ती के विशेष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट ने गांजा तस्करी के एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए चार वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। यह फैसला विशेष न्यायाधीश एनडीपीएस एक्ट सक्ती प्रशांत कुमार शिवहरे ने 23 जून 2026 को सुनाया। अभियोजन के अनुसार, 27 मार्च 2024 को मालखरौदा पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि चन्द्रिका प्रसाद साहू निवासी ग्राम पिहरीद अवैध रूप से गांजा लेकर बिक्री के उद्देश्य से जा रहा है। सूचना मिलने पर तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक सी.पी. कंवर ने सूचना को रोजनामचा में दर्ज कर उच्च अधिकारियों को अवगत कराया और स्वतंत्र गवाहों रोशनलाल बरेठ और उमेश साहू को बुलाकर पुलिस टीम के साथ मौके पर रवाना हुए। एनडीपीएस एक्ट के सभी वैधानिक प्रावधानों का पालन करते हुए पुलिस ने आरोपी की तलाशी ली। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से एक सफेद पारदर्शी पॉलीथिन में रखा 2 किलो गांजा बरामद हुआ। गवाहों की उपस्थिति में तौल कराने पर बरामद गांजे की कीमत लगभग 16 हजार रुपये आंकी गई। पुलिस ने मादक पदार्थ को मौके पर ही जब्त कर सीलबंद किया और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। मामले में आरोपी के खिलाफ थाना मालखरौदा में अपराध क्रमांक 124/2024 के तहत धारा 20 (बी) एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत अपराध दर्ज किया गया। विवेचना के दौरान घटनास्थल का नक्शा तैयार किया गया, जब्ती की कार्यवाही पूरी की गई तथा गवाहों के बयान दर्ज किए गए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध चालान प्रस्तुत कर प्रकरण को विशेष न्यायालय एनडीपीएस एक्ट सक्ती में पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अपने समर्थन में 10 अभियोजन साक्षियों के बयान दर्ज कराए। सभी साक्ष्यों और गवाहों के कथनों का परीक्षण करने के बाद न्यायालय ने आरोपी चन्द्रिका प्रसाद साहू को दोषी करार दिया। न्यायालय ने आरोपी को चार वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। साथ ही आदेश में कहा गया है कि यदि आरोपी अर्थदंड की राशि जमा नहीं करता है तो उसे एक वर्ष का अतिरिक्त सश्रम कारावास भी भुगतना होगा। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से अतिरिक्त लोक अभियोजक उदय कुमार वर्मा ने पैरवी की। न्यायालय के इस फैसले को नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ कड़ा संदेश माना जा रहा है।




