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खान ग्लोबल स्टडीज के लिए चुनौती ज्ञान बिंदु को फंसाने खान सर ने खेला गंदा खेल…और अपने बुने जाल में खुद फंसते नजर आए तो हो गए फरार

आलेख / चितरंजय पटेल अधिवक्ता – शिक्षा के क्षेत्र में प्राइवेट स्कूलों और कोचिंग संस्थानों के अनियंत्रित प्रसार ने एक ओर जहाँ शिक्षा को व्यावसायिक बना दिया है, वहीं दूसरी ओर छात्रों पर भारी मानसिक दबाव, आर्थिक शोषण और सामाजिक असमानता जैसे गंभीर दुष्प्रभाव पैदा किए हैं, यह बात बिहार के फैजल खान @ खान सर के ताजे मामले में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग (विधि) के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि सामाजिक असमानता और शिक्षा का व्यावसायीकरण गरीबों की पहुँच से दूर भारी फीस, प्रवेश शुल्क और अन्य फीस के कारण अच्छी शिक्षा केवल संपन्न परिवारों तक ही सीमित रह गई है। इन परिस्थितियों में खान ग्लोबल स्टडीज के आड़ में तथाकथित खान सर ने बखूबी सस्ती लोकप्रियता बटोरी, पर जब ज्ञान बिंदु संस्थान ने तुलनात्मक एकदम न्यून राशि में अच्छी शिक्षा के साथ विद्यार्थियों की सफलता की मंजिल तक पहुंचाया तो निश्चित रूप से बिहार के पटना में संचालित खान सर की बादशाहत और खोखले दावे की पोल खुल गई और लोग खान ग्लोबल स्टडिस में जारी कोचिंग के नाम पर गोरख धंधे के खिलाफ आवाज बुलंद करने पहुंचे तो अपने निजी सुरक्षा कर्मियों से दनादन प्रदर्शकारियों पर गोली दगवा दिए और अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए प्रदर्शकारियों को ज्ञान बिंदु के संचालक के द्वारा प्रायोजित बताकर उन्हें ही जेल भिजवा दिए, पर खान सर यह भूल गए कि जब पाप का घड़ा भर जाता है तब कुदरती निगाह से कोई नहीं बचता, और हुआ वही वर्तमान थर्ड आई याने वायरल वीडियो के आधार पर खान सर के दोनों ओर खड़े  सुरक्षाकर्मी गोली दागते नजर आ गए। …फिर सुरक्षाकर्मियों की गिरफ्तारी और कबूलनामा कि “खान सर ने कहा कि तुम लोग गोली दागो, बाकी मैं संभाल लूंगा, अब छुपे रुस्तम गरीबों का मसीहे का असली चाल _चरित्र _चेहरा देश के सामने आ गया।… तब खान सर एक बार फिर सज्जनता का चादर ओढ़े न्यायालय में सरेंडर करने की बात करते हुए दिन भर कोर्ट में खड़े पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए और अब फैजल खान अज्ञातवास में चले गए हैं तो वहीं कल तक खान सर को नेकदिल और ग़रीबों का सच्चा हितैषी मानने वाले लोगों की आज आँखें खुल गई है और आज बिहार के शिक्षामंत्री को ऑन मीडिया बोलना पड़ा कि फरार फैजल खान को पाताल से खोज कर लाएंगे और उसकी गुनाहों की सजा उसे मिलेगी।
आज शिक्षा जगत में हमारे आपके आस_पास भी बहुत सारे खान सर जैसे बहुरूपिए बच्चों के शोषण में लगे हुए हैं जो पढ़ने_ पढ़ाने के बजाय एग्जाम्स में पेपर लीक, परीक्षाओं में अवैध इंतजामात की आड़ में बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, और जब किसी कारण से असफल हो जाते है तो अवैध उगाही के खिलाफत को दबाने या तो फैजल खान जैसे गोली चलवाते हे या फिर राजनीति और पुलिस का सहारा लेकर सच्चाई का दमन करते हैं।
यह केवल बिहार की बात ही नहीं है हर प्रदेश, हर जिले में इनके पंडे सक्रिय हैं।  आज विद्यालयों में खेल-कूद और शारीरिक गतिविधियों मृत प्राय हो गई है तथा छात्र स्कूल और कोचिंग के बीच दम घुटते माहौल में अवसाद ग्रसित हो रहे है क्योंकि अधिकांश कोचिंग संस्थान बुनियादी सुविधाओं और आपातकालीन सुरक्षा (जैसे आग या जलभराव) के बिना बेसमेंट या भीड़भाड़ वाले परिसरों में चल रहे हैं। आज पठन-पाठन की गुणवत्ता और रचनात्मकता का ह्रास हो गया है क्योंकि कोचिंग संस्थान आंतरिक समझ विकसित करने के बजाय शॉर्टकट और रटने की तकनीकों पर जोर देते हैं तो वहीं स्कूली शिक्षा की उपेक्षा जारी है तथा स्कूल में छात्र सिर्फ  नाममात्र के लिए जा रहे है और अपनी पूरी ऊर्जा कोचिंग पर केंद्रित करते हैं। जिससे ट्यूशन, प्रोजेक्ट वर्क और विविध शुल्कों के नाम पर अभिभावकों का भारी आर्थिक शोषण हो रहा है तथा निम्न और मध्यम वर्गीय परिवार एजुकेशन लोन   लिए मजबूर हैं। आज निजी स्कूलों और कोचिंग सेंटरों का प्रमुख उद्देश्य मुनाफा कमाना होता है फलस्वरूप योग्य और अनुभवी शिक्षक आम विद्यालयों में अध्यापन से परे लंबे पैकेज पर निजी स्कूल और कोचिंग की ओर रुख कर रहे हैं।
आज शिक्षा जगत में जब एक बड़े कांड का पर्दाफाश हो गया है और सरकार तथा आम लोगों के बीच विमर्श छिड़ गया है तो सरकार आर_पार करते हुए निजी शिक्षण और कोचिंग संस्थानों के विनियमन के लिए सख्त कानून लाए ताकि फिर से योग्य और प्रतिभाशाली विद्यार्थी का भविष्य इन पेपर लीक, परीक्षाओं के सफलता के लिए अवैध इंतजामात आदि से दुष्प्रभावित न हो। तथा शिक्षा संस्थानों में अवैध और अनियंत्रित उगाही अविलंब बंद हो और समाज में ‘अमीरों के स्कूल’ और ‘गरीबों के स्कूल’ की चौड़ी हो रही खाई समाप्त हो।