सक्ती

भागवत कथा के दूसरे दिन व्यास पीठ से पंडित कृष्णा तिवारी ने कपिल अवतार शिव सती चरित्र ध्रुव चरित्र की कथा भक्तगणों को श्रवण कराया

सक्ती – नगर के हटरी धर्मशाला में तिवारी परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के दूसरे दिन व्यास पीठ से पंडित से कृष्णा तिवारी ने भक्तगणों को कपिल अवतार, शिव सती चरित्र, ध्रुव चरित्र, की कथा श्रवण कराते हुए कहा भागवत कथा ही मनुष्य को  श्रवण करते रहना चाहिए भागवत कथा श्रवण करने से मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति होती है भागवत कथा ही हमें ईश्वर के प्रति अटूट प्रेम, धैर्य और पतिव्रता धर्म की शिक्षा देते हैं   राजा उत्तानपाद के पुत्र ध्रुव को उनकी सौतेली माँ सुरुचि ने पिता की गोद में बैठने से रोक दिया  इससे आहत होकर ध्रुव रोते हुए अपनी माता सुनीति के पास पहुँचे माता के समझाने पर ध्रुव ने मात्र ५ वर्ष की आयु में घर छोड़ कर भगवान को पाने के लिए वन की ओर प्रस्थान किया रास्ते में देवर्षि नारद ने उन्हें ॐ नमो भगवते वासुदेवाय मंत्र की दीक्षा दी ध्रुव ने मधुवन में ऐसी कठोर तपस्या की कि भगवान विष्णु को उन्हें दर्शन देने पड़े और ध्रुव को ध्रुव लोक (अटल पद) की प्राप्ति हुई
                         एक बार राजा दक्ष ने  यज्ञ आयोजित किया उन्होंने सभी देवताओं और सगे-संबंधियों को बुलाया, लेकिन भगवान शिव का अपमान करने के उद्देश्य से शिव सती को आमंत्रित नहीं किया सती ने पिता के यज्ञ में जाने की जिद की शिवजी ने समझाया कि बिना निमंत्रण  कहीं जाना उचित नहीं होता, लेकिन सती नहीं मानीं और पिता घर यज्ञ में जा पहुंची जब सती अपने मायके पहुंचीं, तो वहां किसी ने उनका आदर नहीं किया राजा दक्ष ने सबके सामने भगवान शिव का घोर अपमान किया अपने पति का यह अपमान माता सती सहन नहीं कर पाईं और उन्होंने वहीं यज्ञ की पवित्र अग्नि में कूदकर अपने प्राण त्याग दिए जब  भगवान शिव को  को समाचार  मिला, तो वे क्रोधित हो उठे उन्होंने अपने पृथ्वी पर पटकने वीरभद्र की उत्पत्ति हुई और भगवान शिव के आदेश पर ने गणों ने दक्ष प्रजापति के  यज्ञ को विध्वंस कर दिया और भगवान शिव स्वयं सती के पार्थिव शरीर को लेकर ब्रह्मांड में घूमने लगे सृष्टि के विनाश को रोकने के लिए, भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के 51 टुकड़े कर दिए पृथ्वी पर जिन-जिन स्थानों पर सती के अंग और आभूषण गिरे, वह स्थान शक्तिपीठ कहलाए। 
                      सती ने अग्नि में प्राण त्यागते समय यह वरदान मांगा था कि वे अगले जन्म में भी भगवान शिव की ही पत्नी बनें अपने इसी वरदान के फलस्वरूप उन्होंने हिमालय राज के घर जन्म लिया और माता पार्वती के नाम से जानी गईं भगवान शिव से विवाह कर मां पार्वती के रूप में जानी गई कृष्णा तिवारी ने कथा श्रवण कराते हुए कहा कलयुग में भागवत कथा ही एक ऐसी कथा है जो मनुष्य को मोक्ष की प्राप्ति कराती है हर मनुष्य को जब भी समय मिले भागवत कथा श्रवण करना चाहिए  भागवत कथा श्रवण करने प्रतिदिन सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालुओं पहुंच रहे हैं जो भागवत महापुराण की महा आरती कर प्रसाद ग्रहण कर पुण्य का लाभ ले रहे हैं।