सक्ती

सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रही मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइकें, किशोरों की स्टंटबाजी से राहगीर खौफ में

बुलेट के ‘पटाखों’ से दहल रहा बुजुर्गों और हृदय रोगियों का दिल, यातायात नियमों की उड़ रही धज्जियां

बिना लाइसेंस के बाजार और चौक-चौराहों पर नाबालिग दिखा रहे ‘रफ्तार का कहर’, बड़ी दुर्घटना की आशंका

सक्ती –  क्षेत्र में इन दिनों मॉडिफाइड साइलेंसरों की तेज गड़गड़ाहट और किशोरों की लापरवाह ड्राइविंग के कारण सड़क हादसों का खतरा बेहद बढ़ गया है। सक्ती शहर सहित आसपास के ग्रामीण इलाकों में कई बुलेट और अन्य दोपहिया वाहनों में अवैध रूप से साइलेंसर मॉडिफिकेशन करवाकर उन्हें सड़कों पर दौड़ाया जा रहा है। इन वाहनों से निकलने वाली तेज पटाखों जैसी आवाजें जहां एक ओर आम नागरिकों के लिए बड़ी परेशानी का सबब बन रही हैं, वहीं दूसरी ओर कुछ युवाओं और नाबालिग किशोरों द्वारा बेतरतीब व तेज गति से वाहन चलाने के कारण हर समय किसी बड़े सड़क हादसे की आशंका बनी रहती है। इन सिरफिरे वाहन चालकों के कारण क्षेत्र में कानून और शांति की धज्जियां उड़ रहीं हैं।
बुजुर्गों, मरीजों और स्कूली बच्चों का जीना मुहाल
स्थानीय नागरिकों और बुजुर्गों का कहना है कि इन संशोधित साइलेंसरों, विशेषकर कुछ बुलेट बाइकों में से निकलने वाली तेज आवाजें अचानक दिल दहला देती हैं। इससे बुजुर्गों, हृदय रोगियों और स्कूली बच्चों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। ट्रैफिक नियमों को ताक पर रखकर ये वाहन चालक न केवल भयंकर ध्वनि प्रदूषण फैला रहे हैं, बल्कि व्यस्त ट्रैफिक के बीचों-बीच खतरनाक तरीके से ओवरटेकिंग भी करते हैं। इनकी यह हरकत खुद के साथ-साथ दूसरों की जिंदगी से भी खिलवाड़ कर रही है।
बिना लाइसेंस के बाजारों में स्टंटबाजी
हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकांश वाहन चालक किशोर और युवा वर्ग के हैं, जिनके पास कई बार वैध ड्राइविंग लाइसेंस तक नहीं होता। शहर के मुख्य चौक-चौराहों और तंग मुख्य बाजारों में उनकी यह लापरवाह ड्राइविंग राहगीरों, महिलाओं और स्कूली बच्चों के जीवन को सीधे खतरे में डाल रही है। तेज रफ्तार के शौकीन इन युवाओं की जरा सी चूक भी किसी हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ सकती है और किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।
प्रशासन और पुलिस की चुप्पी पर उठ रहे सवाल, सख्त कार्रवाई की मांग
स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने प्रशासन और पुलिस विभाग से इस दिशा में तुरंत और सख्त कार्रवाई करने की मांग की है ताकि लोगों की सुरक्षा और शांति सुनिश्चित हो सके। लोगों का कहना है कि पुलिस तथा यातायात विभाग को शहर और ग्रामीण मार्गों पर विशेष जांच अभियान (चेकिंग पॉइंट) चलाना चाहिए। इसके तहत मॉडिफाइड साइलेंसरों को मौके पर ही जब्त कर नष्ट किया जाना चाहिए। साथ ही, नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने के मामलों में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कड़ी कानूनी और दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।
अभिभावक भी निभाएं अपनी जिम्मेदारी
नागरिकों का मानना है कि इस समस्या पर लगाम लगाने के लिए केवल पुलिसिया कार्रवाई काफी नहीं है, बल्कि अभिभावकों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। पुलिस को ऐसे नाबालिगों के अभिभावकों को थाने बुलाकर कड़ी समझाइश देनी चाहिए कि वे अपने बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखें। बिना उम्र और बिना लाइसेंस के बच्चों को महंगी और तेज रफ्तार गाड़ियां सौंपना मौत को दावत देने जैसा है। अभिभावक बच्चों को यातायात नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करें, ताकि सड़कों पर सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित किया जा सके और किसी भी अनहोनी को समय रहते टाला जा सके।