सरस्वती शिशु मंदिर नैला में कोरबा विभाग स्तरीय समिति की बैठक संपन्न, संगठन की मजबूती और शैक्षणिक विकास पर हुआ मंथन

20 विद्यालयों के 80 पदाधिकारी और 20 प्राचार्य हुए शामिल, बोर्ड परीक्षा में प्रावीण्य सूची, स्मार्ट क्लास और आचार्यों के हितों पर हुई विस्तृत चर्चा

सक्ती – सरस्वती शिक्षा संस्थान, रायपुर की योजनानुसार रविवार को सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, नैला-जांजगीर में कोरबा विभाग स्तरीय समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में विभाग के अंतर्गत संचालित लगभग 20 विद्यालय संचालन समितियों के 80 पदाधिकारी एवं 20 प्राचार्य मुख्य रूप से शामिल हुए। बैठक के दौरान संगठनात्मक सुदृढ़ता, शैक्षिक गुणवत्ता, विद्यालयों की उपलब्धियों तथा उनके विकास से जुड़े विभिन्न अहम विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मां भारती, ॐ एवं मां सरस्वती के चित्र के समक्ष पुष्पार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इसके पश्चात उपस्थित अतिथियों का तिलक-वंदन कर शाल एवं श्रीफल से आत्मीय स्वागत किया गया। बैठक में मुख्य वक्ता के रूप में जुड़ावन सिंह ठाकुर (क्षेत्रीय उपाध्यक्ष, मध्य क्षेत्र), वनांचल सेवा न्यास छत्तीसगढ़ के सचिव चंद्र किशोर श्रीवास्तव, विभाग प्रमुख कीर्ति कुमार अग्रवाल, विभाग सहप्रमुख गोपेश तुलस्यान तथा स्थानीय विद्यालय समिति के अध्यक्ष अरुण कुमार झाझड़िया मंचासीन रहे। कार्यक्रम की विस्तृत रूपरेखा विभाग सहप्रमुख गोपेश तुलस्यान द्वारा प्रस्तुत की गई।
संगठन और आपसी समन्वय पर जोर
मुख्य वक्ता जुड़ावन सिंह ठाकुर ने अपने उद्बोधन में संगठन को सर्वोपरि प्राथमिकता देने तथा बैठकों में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि संस्थान और विद्यालय संचालन समितियों को आपसी समन्वय एवं सहयोग के साथ कार्य करना चाहिए। उन्होंने सभी समिति प्रमुखों से अपने-अपने विद्यालयों की उपलब्धियों, समस्याओं एवं सुझावों को साझा करने तथा विद्यालयों के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
शैक्षणिक उपलब्धियों और सामाजिक सरोकार की सराहना
बैठक में विभिन्न विद्यालयों की शैक्षिक एवं सह-शैक्षिक उपलब्धियों की जानकारी साझा की गई। इनमें बोर्ड परीक्षाओं की प्रावीण्य सूची में विद्यार्थियों का स्थान, खेलकूद, स्मार्ट क्लास, प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन कक्षाएं, शिशु वाटिका, वैदिक गणित तथा त्रिस्तरीय आचार्य प्रशिक्षण प्रमुख रहे। इसके साथ ही, दक्षिण बस्तर में संचालित आवासीय प्रकल्प के अंतर्गत विद्यार्थियों को दी जा रही निःशुल्क शिक्षा की जानकारी भी दी गई। बैठक में इन उपलब्धियों को समाज तक पहुंचाने पर विशेष बल दिया गया।
इन प्रमुख विषयों पर हुआ विचार-विमर्श:
विद्यालय संचालन व व्यवस्था: बस संचालन, गणवेश (यूनिफॉर्म) एवं अभिभावक संपर्क से संबंधित समस्याओं और सुझावों पर चर्चा की गई।
पूर्व छात्र परिषद व सम्मान: सामूहिक वंदे मातरम् गायन, पूर्व छात्र परिषद के गठन तथा प्रशासनिक सेवाओं में चयनित पूर्व विद्यार्थियों को सम्मानित करने पर सहमति बनी।
संस्कार केंद्र: बिलासपुर विभाग के विभाग समन्वयक श्री गेंदराम राजपूत ने संस्कार केंद्रों के संचालन में समाज एवं पूर्व छात्रों की सहभागिता सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
आचार्य हित व कल्याण: जिला प्रतिनिधि रविन्द्र शराफ ने आचार्यों के हितों, ईपीएफ, ईएसआईसी तथा आचार्य सेवा संहिता से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी और सेवा संबंधी व्यवस्थाओं के प्रति जागरूकता के महत्व को रेखांकित किया।
कार्यालयीन निरीक्षण: बैठक में समिति के सचिवों, कोषाध्यक्षों एवं प्राचार्यों को विद्यालय के कार्यालयीन कार्यों का नियमित अवलोकन एवं निरीक्षण करने के लिए प्रेरित किया गया।
आभार प्रदर्शन एवं सराहनीय योगदान
कार्यक्रम के अंत में विभाग समन्वयक मनहरण लाल राठौर ने उपस्थित अतिथियों, समिति पदाधिकारियों एवं प्राचार्यों के प्रति आभार व्यक्त किया। बैठक के सफल आयोजन में स्थानीय विद्यालय समिति के अध्यक्ष अरुण कुमार झाझड़िया, व्यवस्थापक संतोष उपाध्याय, उपाध्यक्ष कैलाश बसईवाल, सहसचिव गुलाबधर दीवान सहित विद्यालय की प्राचार्या बबीता वर्मा, प्रधानाचार्य भगवान दास वैष्णव, समस्त आचार्य-दीदियों तथा भैया-बहनों का सराहनीय योगदान रहा।
