सक्ती

कवि एल.आर. जायसवाल की अंत्येष्टि में उमड़ा बुद्धिजीवियों का सैलाब

तत्क्षण काव्य रचना में माहिर थे वरिष्ठ साहित्यकार एल.आर. जायसवाल

सक्ती। अंचल के वरिष्ठ साहित्यकार, कवि एवं सांस्कृतिक विकास मंच सक्ती के अध्यक्ष तथा सेवानिवृत्त व्याख्याता श्री एल.आर. जायसवाल (86 वर्ष) के निधन से साहित्य एवं सांस्कृतिक जगत में शोक की लहर है। आज उनका अंतिम संस्कार सक्ती स्थित मुक्तिधाम में किया गया।
अंत्येष्टि के पश्चात आयोजित शोकसभा में बड़ी संख्या में साहित्यकार, बुद्धिजीवी, सामाजिक कार्यकर्ता, कर्मचारी नेता एवं नगरवासी उपस्थित हुए। इस दौरान मुक्तिधाम परिसर में बुद्धिजीवियों का सैलाब नजर आया। उपस्थित लोगों ने स्वर्गीय जायसवाल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
शोकसभा को संबोधित करते हुए उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि एल.आर. जायसवाल ऐसे विलक्षण कवि थे, जिन्हें तत्क्षण काव्य रचना करने में विशेष महारत हासिल थी। तो वहीं रमेश तिवारी ने कहा कि साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक सरोकारों के प्रति उनका समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।देवेंद्र अग्निहोत्री ने उन्हें मानस मर्मज्ञ कहा तो वहीं भगत साहू ने बताया कि उन्होंने अपनी रचनात्मक प्रतिभा से सक्ती अंचल की साहित्यिक पहचान को समृद्ध किया।
चतुर सिंह चंद्रा ने कहा कि श्री जायसवाल का निधन साहित्य एवं सांस्कृतिक क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। उनकी साहित्य साधना, सहज व्यक्तित्व और काव्य प्रतिभा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनी रहेगी।
शोकसभा में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति एवं शोकाकुल परिवार को इस अपूरणीय दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की।