अघरिया समाज खरसिया क्षेत्र के केंद्रीय प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ पत्रकार गोपाल कृष्ण नायक “देहाती” का आकस्मिक निधन


सिद्धांतों पर अडिग रहे ‘देहाती’, उनका जाना समाज और पत्रकारिता के लिए अपूर्णीय क्षति – चितरंजय पटेल
सक्ती- अखिल भारतीय अघरिया समाज सक्ती क्षेत्र ने अघरिया समाज खरसिया क्षेत्र के केंद्रीय प्रतिनिधि एवं वरिष्ठ पत्रकार गोपाल कृष्ण नायक “देहाती” के आकस्मिक निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की है। इस दौरान समाज के प्रमुख प्रतिनिधियों ने उनके योगदान और जीवन मूल्यों को याद किया। अखिल भारतीय अघरिया समाज सक्ती के केंद्रीय प्रतिनिधि एवं उच्च न्यायालय के अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने स्वर्गीय गोपाल कृष्ण नायक के जुझारू व्यक्तित्व को रेखांकित करते हुए एक संस्मरण साझा किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती दिनों में जब शहरी क्षेत्र के तथाकथित पत्रकारों ने गोपाल कृष्ण को ‘देहाती’ कहकर नीचा दिखाने और तिरस्कृत करने का दुस्साहस किया था, तब उन्होंने इसे कमजोरी मानने के बजाय अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने ‘देहाती’ शब्द को ही अपना तख़ल्लुस (उपनाम) स्वीकार किया और इसी नाम से पत्रकारिता के क्षेत्र में एक बेमिसाल मुकाम हासिल किया。
अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने आगे कहा कि स्वर्गीय गोपाल कृष्ण नायक समाज, राजनीति या पत्रकारिता, हर क्षेत्र में विपरीत से विपरीत परिस्थितियों के बीच भी हमेशा अपने सिद्धांतों पर अडिग रहे। अघोर पंथ से दीक्षित होने के कारण उनके व्यक्तित्व में अघोरियों जैसा एक विशेष अक्खड़पन और बेबाकी नजर आती थी, जो उन्हें दूसरों से अलग बनाती थी।
अघरिया समाज सक्ति क्षेत्र के अध्यक्ष डमरूधर पटेल ने कहा कि आज गोपाल कृष्ण नायक का हमारे बीच न रहना और उनका स्मृतिशेष हो जाना केवल उनके परिजनों के लिए ही नहीं, बल्कि हम सभी सामाजिक बंधुओं और संपूर्ण अघरिया समाज के लिए एक अपूरणीय क्षति है, जिसकी भरपाई कभी नहीं की जा सकती।
