प्रधानमंत्री ने मन की बात में कारगिल के शहीदों का किया स्मरण

सक्ती – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में कारगिल विजय दिवस के अवसर पर देश के वीर शहीदों और सैनिकों को नमन करते हुए कार्यक्रम की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि कारगिल विजय दिवस देश के लिए गर्व का दिन है और यह भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस, शौर्य एवं बलिदान की याद दिलाता है। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने देश में जल संरक्षण, आत्मनिर्भरता, युवा शक्ति, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी से जुड़ी विभिन्न पहलुओं का उल्लेख किया। उन्होंने लोगों से अपने आसपास के तालाबों, कुओं और बावड़ियों जैसे पारंपरिक जलस्रोतों के संरक्षण की दिशा में जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। छत्तीसगढ़ के कोरबा में जल संरक्षण के प्रयासों का भी उल्लेख ‘कैच द रेन’ अभियान के संदर्भ में किया गया। उन्होंने सेवा संकल्प अभियान के तहत छत्तीसगढ़ ने आंगनबाड़ियों में आंगन मिलन समारोह में पोषण आहार के रूप में मोरेगा, मूनगा, सहजन को प्रोत्साहित करने के लिए मुनगा पौधे भेंट करने को तारीफ ए काबिल बताया। इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने देश की प्रतिभाओं, नवाचारों और स्थानीय स्तर पर किए जा रहे जनहितकारी कार्यों को राष्ट्रीय मंच प्रदान करने की भूमिका पर भी प्रकाश डाला। कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों और संस्थाओं के प्रयासों को सामने लाया गया।
उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि ‘मन की बात’ अब केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी देने वाला कार्यक्रम नहीं रह गया है, बल्कि यह समाज, शिक्षा, संस्कृति, पर्यावरण, नवाचार तथा देशभर के प्रेरणादायक व्यक्तित्वों और जनभागीदारी की कहानियों को व्यापक पहचान दिलाने का प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संस्करण में अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़ी प्रेरक पहल सामने आने के कारण लोगों में यह उत्सुकता बनी रहती है कि इस बार प्रधानमंत्री देशवासियों के साथ किन विषयों और उपलब्धियों को साझा करेंगे।
पटेल ने कहा कि कारगिल विजय दिवस जैसे अवसरों पर वीर जवानों के बलिदान का स्मरण नई पीढ़ी में राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी और कर्तव्यबोध को मजबूत करने का माध्यम भी बनता है। उन्होंने कहा कि जल संरक्षण, पर्यावरण, आत्मनिर्भरता और सामाजिक सहभागिता जैसे विषयों को जनसंवाद का हिस्सा बनाना समाज को सकारात्मक दिशा में प्रेरित करता है।
