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चांपा के सोनी परिवार में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन व्यास पीठ से आचार्य राजेंद्र महाराज ने भगवान नाम की महिमा का सरस वर्णन किया

चांपा के सोनी परिवार में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन व्यास पीठ से आचार्य राजेंद्र महाराज ने भगवान नाम की महिमा का सरस वर्णन किया kshititech
चांपा के सोनी परिवार में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन व्यास पीठ से आचार्य राजेंद्र महाराज ने भगवान नाम की महिमा का सरस वर्णन किया kshititech

चांपा । भगवान का नाम ही सर्वोपरि है, भगवान के नाम का स्मरण और उच्चारण यदि मनुष्य भूल से भी कर ले अथवा ज्ञान या अज्ञान अवस्था में करें उसका कल्याण ही होता है । वस्तु शक्ति कभी भी हमसे श्रद्धा की अपेक्षा नहीं रखती ,उसे हम माने या ना माने उसका प्रभाव रहेगा ही । जिस प्रकार आग को नहीं मानने पर भी वह जलाएगा ही ,जहर को नहीं मानने पर पीने वाला मरेगा ही, विद्युत के आवेश को नहीं मानने पर भी उसे करेंट का झटका लगेगा ही ठीक उसी प्रकार भगवान नाम को भी नहीं मानकर नाम लेने से ही सभी प्रकार के पाप जलकर नाश होते हैं । चांपा सदर बाजार के सोनी परिवार में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के चौथे दिन व्यास पीठ से आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने भगवान नाम की महिमा का सरस वर्णन करते हुए यह उदगार प्रकट किए ।
आचार्य राजेंद्र महाराज द्वारा अजामिल ब्राह्मण की कथा , गजेंद्र मोक्ष और हरी नाम की महिमा के साथ समुद्र मंथन ,वामन अवतार, श्री राम प्रसंग और श्री कृष्णा अवतार एवं नंद उत्सव का विस्तार से वर्णन करते हुए बताया कि समुद्र मंथन देवताओं और दानवों के द्वारा अमित प्रताप के लिए किया गया था किंतु समुद्र मंथन हेतु दोनों ने ही एक ही समान बल लगाया एक ही मुहूर्त पर मंथन किया गया किंतु परिणाम देवताओं के पक्ष में गया,अमृत असुरों को नहीं मिला । आचार्य ने कहा कि अमृत केवल उनको ही मिलता है ,जिनका मन श्री भगवान पर लगा रहता है , संसार की माया पर नहीं । भागवत कथा अमृत प्राप्त करने हेतु मन को भगवान पर ही लगाना होगा ।
सर्वस्व समर्पण करने पर भगवान दानदाता के ऋणी बन जाते है । और राजा बलि की तरह हमेशा दानदाता की रक्षा भी करते हैं। भगवान वामन ने राजा बलि को पातालपुरी का राजा बनाया और उसकी रक्षा करने के लिए स्वयं भवन में चौकीदार बन गए तथा हमेशा के लिए चिरंजीवी होने का वरदान देकर भगवान ने कहा की आठवी मन्वंतर में तुम इंद्र भी बनोगे ।
नवम स्कंध में आचार्य ने मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम को साक्षात धर्म की मूर्ति के रूप में अवतार लेना बताया । मनुष्य जीवन में मर्यादा का पालन करते हुए गृहस्थ धर्म को आत्मसात करना होगा तभी सनातन और धर्म की रक्षा हम कर सकेंगे । कथाओं की परंपरा से हमें अपनी भावी पीढ़ी को संस्कारित और शिक्षित बना कर अपने कल का गौरव बढ़ा सकते हैं। वृद्धावस्था आने पर संपत्ति की नहीं बाल अपनी संतति अर्थात अपने संतान की आवश्यकता होती है । श्री कृष्णा अवतार महोत्सव के अवसर पर सभी श्रोताओं में बधाई गीत का आनंद लेते हुए कथा रसपान किया ।
भागवत कथा के चौथे दिन कथा श्रवण करने हेतु कार्तिकेश्वर स्वर्णकार ,सुरेश कुमार ,वर्षा सोनी ,श्री मति शुक्रिता , कन्हैया कैवर्त्य , श्रीमति कविता ख़ेम करण देवांगन ,प्रदीप सोनी  एवं आयोजक परिवार सहित नगर के सैकड़ो श्रद्धालु श्रोता उपस्थित थे । श्रीमद् भागवत कथा के आयोजक श्रीमती कुसुम दिलीप कुमार सोनी द्वारा अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण करने हेतु आने की अपील की गई है ।