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किसानों ने धान खरीदी की लिमिट बढ़ाने हेतु किये मांग

किसानों ने धान खरीदी की लिमिट बढ़ाने हेतु किये मांग kshititech

बिर्रा – किसानों ने धान खरीदी की लिमिट बढ़ाने के लिए कृषि मंत्री एवं मुख्यमंत्री से मांग किए हैं। धान खरीदी की मात्रा को दो हजार क्विंटल  बढ़ाने की मांग किसानों ने किया है। सेवा सहकारी समिति मर्यादित बिर्रा पंजीयन क्रमांक 1012 मे  प्रतिदिन धान की आवक बढ़ने के कारण किसानों का हर रोज नौ सौ छै क्विंटल धान खरीदी हो रही है। प्रत्येक दिन किसान अपने धान बेचने के लिए धान खरीदी केंद्र में चक्कर लगा रहे हैं। वहीं इस बार किसान के धान को बीमारी ने घेर रखा था और दूसरी तरफ किसी तरह धान को अपने खलिहान में रखकर धान की रतजगा करना पड़ रहा है। वैसे तो धान उपार्जन केन्द्र में किसान अपने टोकन कटवाने और आनलाईन टोकन तुहंर द्वार के माध्यम से धान की टोकन कटवाने के कारण किसान फजीहत में पड़ गया है और किसान का धान टोकन जारी होने के कुछ समय बाद टोकन सिस्टम बंद हो जा रहा है। वैसे तो सभी तरफ से किसानों को नुक़सान उठाना पड़ रहा है। अंचल के धान उपार्जन केंद्रों में धान बेचने के लिए टोकन नहीं जारी हो रहा है जबकि प्रतिदिन धान की आवक 2000 क्विंटल बढ़ाने की मांग की जा रही है। वैसे तो किसान को धान की आवक 2000 क्विंटल नहीं बढ़ाया गया तो धान खरीदी की समयावधि में धान खरीदी नहीं हो पाएगा। हालात धान खरीदी केंद्र की इतनी खराब हो गया है कि किसान धान खरीदी केंद्र प्रभारी और कम्प्यूटर आपरेटर को खरी खोटी सुना करके चले जाते हैं। जिसके कारण धान खरीदी केंद्र प्रभारी और कम्प्यूटर आपरेटर को हर रोज किसानों के साथ कहा सुनी होना आम बात हो गई है। वैसे तो सरकार ने किसानों के सच्चे हितैषी और सुखदुख का साथी मानने वाले विष्णु देव  सायं की सरकार ने किसानों के साथ हमेशा ही छलावा किया है। आज किसान सभी तरफ से अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं।  किसानों की धान की आवक हर रोज दो हजार कि्क्वटल बढ़ाया जाए, तभी किसानों के धान खरीदी संभव हो सकता है। अन्यथा लाखों क्विंटल धान खरीदी नहीं हो पाएगा। बिर्रा एवं आसपास के धान खरीदी केंद्र सिलादेही, डभराखुर्द, बंसुला, किकिरदा, झरप, घिवरा, मल्दा आदि धान उपार्जन केंद्रों में शासन ने सेवा सहकारी समिति के माध्यम से किसानों के धान को समर्थन मूल्य पर खरीदी कर रहा है।तथा धान उपार्जन केन्द्र में धान की प्रतिदिन नौ सौ किक्वटल तो कई केंद्रों 600 क्विंटल धान की खरीदी हो रही है। सिस्टम भी इससे आगे नहीं बढ़ रहा है। ऐसे में धान खरीदी ऊंट के मुंह में जीरा के समान हो रहा है, जबकि प्रतिदिन दो हजार क्विंटल धान खरीदी होने से ही संभव हो पाएगा। आनलाईन टोकन बना जी का जंजाल । शासन ने टोकन तुहंर द्वार के तहत्  छत्तीसगढ़ के सभी किसानों को उलझा कर परेशान करके रख दिया है। किसान अपने स्वयं के स्मार्टफोन से टोकन काट सकते हैं। शासन ने किसानों को स्वयं से टोकन काटने का 70 प्रतिशत एवं सेवा सहकारी समिति को 30 प्रतिशत टोकन काटने काअधिकार दिया गया है। लेकिन टोकन तुहंर द्वार की पोर्टल में समस्या आने के कारण किसानों को परेशान होना पड़ रहा है। हर रोज रात के 12 बजे किसान टोकन काटने शुरू कर देते हैं क्योंकि इस पोर्टल का सर्वर हमेशा डाऊन हो जाता है तथा कई बार सर्वर कई घंटो तक गोल गोल घुमने लगता है। जिसके कारण किसान को अनेक बेवजह परेशानियां से गुजरना पड़ता है। किसान और समितियों की समस्या को जल्द ही बहाल करने की मांग छत्तीसगढ़ के सरकार विष्णुदेव साय से किया गया है।