सक्ती

कोटेतरा मुख्यालय में नहीं बैठ रहे पटवारी, छोटे-छोटे कामों के लिए भटक रहे किसान, आक्रोश

मुख्यालय से पटवारी के गायब रहने से गिरदावरी, सीमांकन और ऋण पुस्तिका जैसे जरूरी काम ठप

सक्ती/जैजैपुर-  शासन के स्पष्ट निर्देश के बावजूद कि सभी मैदानी राजस्व कर्मचारी अपने निर्धारित मुख्यालय पर रहकर आम जनता की समस्याओं का निराकरण करेंगे, जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट नजर आ रही है। स्थानीय कोटेतरा हल्का मुख्यालय में पटवारी के नियमित रूप से न बैठने के कारण क्षेत्र के किसान और ग्रामीण बेहद परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पटवारी के अपने मुख्यालय पर उपस्थित न होने के कारण उन्हें तहसील कार्यालय या पटवारी के निजी निवास के चक्कर काटने को मजबूर होना पड़ रहा है।
वर्तमान में खेती-किसानी से जुड़े कई महत्वपूर्ण कार्य जैसे खरीफ फसल की गिरदावरी का सत्यापन, जमीन का नामांतरण, बटवारा, सीमांकन और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के लिए जरूरी कागजात बनवाने का काम पूरी तरह प्रभावित हो चुका है। दूर-दराज के गांवों से आने वाले किसान दिनभर इंतजार करने के बाद बैरंग लौटने को मजबूर हैं, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बर्बाद हो रहा है।

किसानों का क्या कहना है?

स्थानीय किसानों का कहना है कि “पटवारी साहब कब आते हैं और कब चले जाते हैं, इसकी कोई निश्चित जानकारी नहीं होती। कई बार फोन करने पर भी संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। यदि यही स्थिति रही, तो किसान खेती का काम छोड़कर सिर्फ सरकारी दफ्तरों के चक्कर ही काटते रह जाएंगे।”

जिम्मेदारों का रुख:

इस संबंध में ग्रामीणों ने एकजुट होकर जल्द ही अनुविभागीय अधिकारी (SDM) और तहसीलदार को ज्ञापन सौंपने का निर्णय लिया है। ग्रामीणों की मांग है कि कोटेतरा मुख्यालय में पटवारी के बैठने के दिन और समय को निश्चित किया जाए और लापरवाही बरतने वाले कर्मचारी पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।