सरदार वल्लभ भाई पटेल की ७५ वीं पुण्य तिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित

सक्ती – राष्ट्रीय एकता के प्रतीक लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल सशक्त भारत के जनक थे, यह बात कहते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग (विधि) के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने बताया कि आजादी के समय देश के रियासतदान जब आपस में लड़ मर रहे थे तभी आजादी के बाद ५०० से अधिक देशी रियासतों को भारत संघ में शामिल कर राष्ट्रीय एकता की मिसाल कायम किया फलस्वरूप वल्लभ भाई पटेल इतिहास में लौह पुरुष के नाम से अमर हो गए, निश्चित रूप से राष्ट्रीय एकता और अखंडता की प्रतिमूर्ति सरदार पटेल को उनकी पुण्यतिथि पर राष्ट्र के प्रति के उनके योगदानों को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित किया गया। सरदार वल्लभभाई पटेल को बारडोली सत्याग्रह (1928) के दरमियान महिलाओं के द्वारा ‘सरदार’ (नेता) की उपाधि दी गई थी, क्योंकि उन्होंने ब्रिटिश सरकार द्वारा लगाए गए भारी करों के खिलाफ किसानों का सफलता पूर्वक नेतृत्व किया और उन्हें जीत दिलाई थी तो वहीं अपनी वाक चातुर्य और दृढ़ संकल्प से देशी रियासतों को भारतीय संघ में एकीकरण कर एक सशक्त भारत की संरचना कर भारत की एकता और अखंडता को सुनिश्चित किया फलस्वरूप उनके फौलादी निर्णय क्षमता के लिए लौह पुरुष कहा गया।
आज लौह पुरुष के ७५वीं पुण्य तिथि पर पूरा देश उनको स्मरण करते हुए स्टेच्यू ऑफ यूनिटी के समक्ष नत मस्तक है कि आज भी राष्ट्र को उनकी तरह दृढ़ संकल्पशील राष्ट्रभक्त व्यक्ति की आवश्यकता है जो देश की एकता और अखंडता सुनिश्चित कर सके।


