सक्ती की आराध्य देवी मां महामाया ही करेगी सक्ती का उद्धार…

रश्मि गबेल कांग्रेस जिलाध्यक्ष नियुक्त… डॉ महंत के पूर्व नियोजित रणनीति
आलेख / चितरंजय पटेल । सक्ती की राजनीति प्रक्षेत्र में एक मात्र धुरंधर डा. चरण दास महंत की बानगी महिला मतदाताओं को साधने सशक्त महिला हस्ताक्षर रश्मि गबेल कांग्रेस के सक्ती जिलाध्यक्ष नियुक्त की गई है जो प्रारंभ से ही डॉ महंत की अनुगामी रही है। इससे सबक उनके उन समर्थकों को लेना होगा जो अपनी निकटता का बखान करते समय डा महंत के चश्मे के नीचे से झांक कर लोगों को नापने की कला से अंजान है, क्योंकि जब भी डा महंत ने सिर झुका कर चश्मे से अलग जिस किसी पर निगाह डाली है उसकी राजनीति में शनि का प्रकोप नजर आने लगता है फिर उसका सूर्य कितना भी मजबूत हो अर्थात वह कितना भी तेजस्वी हो, उसके राजनीतिक सफलता पर ग्रहण लगती चली जाती है।
साफ है सक्ती की वर्तमान राजनीति के एकमात्र और सशक्त हस्ताक्षर डा महंत का सीधा नजर आप पर है तो आप मुकद्दर का सिकंदर हो वरना उनकी वक्र दृष्टि से लोग घायल होकर ही रह जाते हैं। फिर चाहे वह डा महंत को छोड़ कर कहीं भी जाएं, राजनीति करने लायक नहीं रह जाते हैं क्योंकि डा महंत के फितरत में यह भी शामिल है कि विरोधी दल से उनका निपट प्रेम का प्रभाव इतना होता है कि उनका शिकार व्यक्ति वहां जाकर भी उनके दुष्प्रभाव से नहीं बच पाता। इन परिस्थितियों में हिंदी फिल्मों का यह डायलॉग उन पर ठीक फबता है कि हमारे दरबार में तुम आए अपने मन से, पर जब आ गए हो तो अब तुम्हारे जीनेक्ष मरने दोनों में, मर्जी हमारी चलेगी… इसलिए डा महंत की चरण में जाने के पहले ही सोच लें कि अगर उनके हो गए तो फिर, जीने मरने तक उनका साथ निभा सकते हो या नहीं, वरना यह तय है कि उनके कोप भाजन का शिकार व्यक्ति राजनीति क्षेत्र में सक्ती इलाके में महंती नहीं कर सकता। वैसे भी सक्ती क्षेत्र का इतिहास रहा है, यहां BJP कांग्रेस की B पार्टी ही नजर आती रही है अर्थात BJP कभी महल के इशारों पर चली है तो अब महंत के बातों का भली भांति मान रखती है। फिलहाल सक्ती जिले के एकमात्र सर्वमान्य नेता डा चरणदास महंत हैं, कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी। ऐसी स्थिति में कबीरहा महंत समाज और गबेल समाज के बीच आंतरिक गठबंधन से इंकार नहीं किया जा सकता। खासकर! जब सक्ती क्षेत्र में डा महंत के खास तेली समाज के अपने लोगों से उनकी खटास जग जाहिर है। फिर राजनीति में कोई स्थाई दोस्त या दुश्मन नहीं होता तथा परिस्थितियों के अनुकूल राजनीतिक रिश्ते सबसे जल्दी बदल जाते हैं। जहां तक रश्मि गबेल के जिलाध्यक्ष बनने की पटकथा तभी लिखी जा चुकी थी जब राजनीति के गलियारों में यह चर्चा आम हो गई थी कि सक्ती जिलाध्यक्ष की कुर्सी महिला के लिए आरक्षित है, फिर चतुर सुजान डा महंत इस बात के लिए ख्यातिलब्ध हैं कि उनके आने की खबर फैल जाने के तीन चार घंटे के बाद घर से निकलते हैं फिर उनको जिसे ताज पहनाना हो उसका लाइन क्लियर महिला अध्यक्ष की बात फैलाकर बहुत पहले ही कर दी गई थी। तब आज कुछ लोगों के द्वारा रश्मि गबेल की नियुक्ति को लेकर असहमति व्यक्त करने की बात नक्कार खाने की तूती के अलावा कुछ भी नहीं है जिसे डॉ महंत के राज में कोई सुनने वाला भी नहीं है।
परंतु यक्ष प्रश्न यह है कि अब सक्ती की आम जनता से स्वहित चिंतन कब करेगी। उसे अपने हित के लिए खुद सोचना होगा कि अपने अपने इन सेटिंग बाज नेताओं के साजिश से परे कैसे क्षेत्र के वास्तविक विकास के लिए अलग हटकर पहल करे… क्योंकि BJP कांग्रेस के अनैतिक ठगबंधन में शामिल नेताओं से कैसे निजात मिले और नवोदित सक्ती जिले के विकास के लिए हकीकत में पहल हो क्योंकि आज सक्ती की स्वर्णिम अतीत बाजार ग्राउंड, मवेशी बाजार, बुधवारी बाजार, राउत मेला आदि लगभग समाप्त हो चुके है तो वहीं जिला व तहसील न्यायालय, जिला अस्पताल, सरकारी कालोनियां पलायन के कागार पर हैं…फिर तो यही बात होगी, राजा गए, राज गई… जेठा आबाद और सक्ती बर्बाद…जय श्री राम…जय महामाया… हे सक्ती की मां, अपने शक्ति से ही सक्ती की रक्षा करें, यही कामना, यही प्रार्थना मां तेरी चरणों में… चितरंजय पटेल, अधिवक्ता


