सरकार की कार्रवाई के खिलाफ सहकारी समिति के हड़ताली कर्मचारियों के परिवारजन पहुंचे सक्ती कलेक्ट्रेट कार्यालय

डिप्टी कलेक्टर को सौपा ज्ञापन, परिवारजनों ने कहा- 25 नवंबर से कलेक्टर कार्यालय के सामने बैठेंगे बच्चों के साथ धरने पर
सक्ती – छत्तीसगढ़ प्रदेश में 15 नवंबर से धान खरीदी का कार्य राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ किया जा चुका है एवं सहकारी समितियो के कर्मचारियों तथा कंप्यूटर ऑपरेटर अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर बिना शासन की अनुमति के भी हड़ताल पर डटे हुए हैं तथा हड़ताल पर डटे होने के कारण 16 नवंबर को एक आदेश जारी कर प्रदेश के 15 सहकारी समितियो के कर्मचारियों को सेवा समाप्ति का आदेश भी जारी कर दिया गया है किंतु इसके बावजूद हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि जब तक हमारी चार सूत्रीय मांगों पर सरकार हमें आश्वस्त नहीं करती तब तक यह हड़ताल जारी रहेगी तथा 15 नवंबर से प्रारंभ हुई दान खरीदी के कार्य में जहां राज्य शासन ने हड़ताली कर्मचारियों की हठधर्मिता को देखते हुए विकल्प के तौर पर पंचायत के सचिवों को धान उपार्जन केदो में धान खरीदी की जिम्मेदारी सौंप दी है तो वहीं अस्थाई तौर पर कंप्यूटर ऑपरेटरो को खरीदी केदो में तैनात किया गया है किंतु इसके बावजूद अपनी मांगों को लेकर हड़ताली कर्मचारियों ने भी कड़ा रूख अख्तियार करना चालू कर दिया है 17 नवंबर को कर्मचारियों ने सक्ती जिले के कलेक्ट्रेट कार्यालय में अपने परिवार जनों के माध्यम से कलेक्टर को एक ज्ञापन प्रेषित किया है
कर्मचारियों ने मीडिया से करी थी अपील
तथा इस संबंध में कर्मचारियों ने मीडिया से भी भावनात्मक अपील करते हुए कहा था कि परिवारों के मुखियाओं (सहकारी कर्मचारी एवं कंप्यूटर ऑपरेटर) की 4 सूत्रीय जायज़ मांगों के त्वरित समाधान हेतु अंतिम चेतावनी स्वरूप निवेदन किया जा रहा है, सक्ती जिले के सहकारी कर्मचारी, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं अधिकारी लगातार 15 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर डटे हुए हैं।ये वही लोग हैं जो वर्षभर जिले की सभी सरकारी व्यवस्थाओं को चलाते हैं—लेकिन आज अपने अधिकारों और सम्मान के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर हैं। हम, इन कर्मचारियों के परिवारजन—स्त्रियाँ, बच्चे, बुज़ुर्ग—एक-एक दिन भय, पीड़ा और अनिश्चितता में काट रहे हैं।रसोई की आग धीमी पड़ रही है, दवाइयाँ रोकनी पड़ रही हैं, और बच्चों की आँखों से भविष्य का भरोसा झरने लगा है,शासन-प्रशासन की उदासीनता असहनीय,अस्तित्व पर सीधा प्रहार,अब तक शासन-प्रशासन ने कर्मचारियों की 4 सूत्रीय मांगों पर एक भी ठोस कदम नहीं उठाया है,इसके विपरीत, आउटसोर्सिंग के नाम पर वैकल्पिक व्यवस्था लागू कर हमारे घरों के मुखियाओं की आजीविका पर प्रहार किया जा रहा है। यह कदम हम परिवारों को ऐसा महसूस कराता है कि हमारे अस्तित्व, सम्मान और जीवन पर सीधा आघात किया जा रहा है। दंडात्मक कार्यवाही तानाशाही का परिचायक है, समाचार पत्रों के माध्यम से ज्ञात हुआ कि हड़तालरत कर्मचारियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही की जा रही है। यह कदम न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रश्नचिह्न है। हम मांग करते हैं कि ऐसी सभी दंडात्मक कार्यवाहियों को तत्काल प्रभाव से शून्य घोषित किया जाए।हमारी अंतिम अपील – अंतिम चेतावनी है,हम परिवारजनों का स्पष्ट कहना है कि यदि आगामी 7 दिवस के भीतर कोई ठोस, स्पष्ट और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया,तो दिनांक 25/11/2025 से हम—महिलाएँ, बच्चे, बुज़ुर्ग सहित—कलेक्टर कार्यालय के समक्षअनिश्चितकालीन उग्र धरना देने के लिए विवश होंगे। तथा उपरोक्त अपील सहकारी कर्मचारी संघ जिलाध्यक्ष एकलव्य चंद्रा एवम कंप्यूटर ऑपरेटर संघ जिलाध्यक्ष पुरूषोत्तम बरेठ एवंसमस्त सहकारी कर्मचारी / कंप्यूटर ऑपरेटर परिवारजन जिला – सक्ती (छत्तीसगढ़) द्वारा की गई थी
परिवार जनों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में दिया ज्ञापन
सहकारी समिति के हड़ताली कर्मचारियों के परिवार जनों ने 17 नवंबर को जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय सक्ती पहुंचकर वहां मौजूद डिप्टी कलेक्टर बालेश्वर राम को ज्ञापन सोपा है, जिसमें परिवारजनों ने बताया है कि हमारे परिवारों के मुखियाओं (सहकारी कर्मचारी एवं कंप्यूटर ऑपरेटर) की 4 सूत्रीय जायज मांगों के त्वरित निराकरण हेतु करबद्ध निवेदन करते है कि सक्ती जिले के समस्त सहकारी कर्मचारी, कंप्यूटर ऑपरेटर एवं कर्मचारी पिछले 15 दिनों से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। ये सभी कर्मचारी हमारे परिवारों के मुखिया, सहारा तथा आजीविका का एकमात्र आधार हैं।महोदय, अत्यंत दुःख और पीड़ा के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे घरों का दीपक इन्हीं से जलता है,चार सूत्रीय मांगों पर कोई संबेदनशील पहल नहीं की गई है।हमारे बच्चो की पढ़ाई, बुजुर्गों का इलाज, परिवार का निर्वहन सब कुछ इन्हीं पर निर्भर है।हड़ताल लंबी होने से अब हम परिवारजन गंभीर आर्थिक, मानसिक और सामाजिक संकट से गुजर रहे हैं। घर चलाना दूभर हो गया है, रसोई का चूल्हा ठंडा पड़ने लगा है, बच्चों के सवालों का जवाब नहीं पा रहें हैं, और बुजुर्ग चिंताओं में रात भर सो नहीं पा रहे,महोदय, दुख की बात यह है कि जिले के संबंधित अधिकारियों द्वारा आउटसोर्सिंग के तहत वैकल्पिक अपामले व्यवस्था लागू कर हमारे घर के मुखियाओं की हमारे पेट पर प्रहार की जा रही है। यह स्थिति हम सम्ली परिवारजनों को ऐसा महसूस करा रही है मानो हमारे अस्तित्व और सम्मान पर सीधा आघात किया जा रहा है,समाचार पत्रों के माध्यम से यह ज्ञात हुआ है कि हमारे इन कर्मचारियों के विरुद्ध शासन-प्रशासन दंडात्मक कार्यवाही की जा रही है, जो न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि पूर्णतः तानाशाही प्रवृत्ति को बताती है। ऐसी किसी भी दंडात्मक कार्रवाई को तत्काल प्रभाव से शून्य घोषित किया जाना पायोचित होगा।हम दृढ विश्वास रखते हैं कि जो कर्मचारी वर्षभर पूरी निष्ठा और ईमानदारी से अपनी सेवाएँ देते हैं, उनकी जायज मांगों के समाधान में देरी नहीं होनी चाहिए।अतः, शक्ति जिले के समस्त सहकारी कर्मचारियों एवं कंप्यूटर ऑपरेटरों के परिवारजन आपसे अपने हाथों से विनम्र निवेदन करते हैं कि कृपया उनकी 4 सूत्रीय मांगों पर तत्काल सहानुभूतिपूर्ण निर्णय लेकर हमारे घरों में फिर से उजाला, हमारे बच्चों के चेहरों पर फिर से मुस्कान, और हमारे मुखियाओं के लिए सम्मान और सुरक्षा सुनिश्चित करें। हम आपसे विनम्र निवेदन करते हैं कि यदि हमारी इन जायज़ मांगों के संबंध में आगामी 7 दिवस के भीतर कोई ठोस, स्पष्ट एवं सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तो दिनांक 25/11/2025 से हम सभी कर्मचारी अपने पूरे परिवार-बालक, महिलाएँ एवं बुजुर्ग जन सहित-कलेक्टर कार्यालय के समक्ष अनिश्चितकालीन धरना/हड़ताल हेतु विवश होंगे।चार सूत्रीय मांगों की प्रतिलिपि आवेदन के साथ संलग्न है।आपकी एक सकारात्मक पहल हजारों परिवारों के टूटते विश्वास को संबल दे सकती है और पूरे जिले में राहत एवं संतोष का वातावरण बना सकती है।


