सक्ती

भागवताचार्य राजेंद्र महाराज भी पहुंचे गया जी

सक्ती/गया‌।  पितृपक्ष में चल रहे पिंडदान को लेकर भागवताचार्य राजेंद्र महराज ने कहा मोक्ष और ज्ञान की नगरी गया जी में  पितृ पक्ष के अवसर पर मातृ पितृ ऋण से मुक्त होने के लिए  देश के कोने-कोने से अनेक परिवार के लोग गया जी के अलग-अलग स्थान में अपने पितरों की सद्गति की कामना को लेकर पिंडदान और जल तर्पण कर रहे हैं ।
पौराणिक काल से ही भारत भूमि अर्पण तर्पण और समर्पण की भूमि रही है । गयासुर नाम के दानव को भगवान विष्णु से वरदान प्राप्त था, कि तुम्हारा नाम से ही इस क्षेत्र का नाम गया तीर्थ होगा , जहां फल्गु नदी के तट पर और विष्णुपद मंदिर परिक्षेत्र के चारों ओर तथा गया क्षेत्र के अन्य स्थानों पर भी यदि कोई पिंडदान या जल तर्पण करें तो उनके पितरों की सद्गति होगी । देश विदेश के लोग भी गया जी में आकर पुण्य स्थान का दर्शन लाभ प्राप्त कर रहे हैं ।
छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध भागवत कथा वाचक आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने गया जी के महत्व के संबंध में बताया कि धन्य होते हैं वह बेटे और परिवार के लोग जो अपने पितरों की सद्गति की कामना से गया क्षेत्र के 54 अलग-अलग निर्धारित स्थानों में श्रद्धा और तर्पण करते हैं ।
प्रतिदिन फल्गु नदी के तट पर महा आरती का दृश्य और पितृ दिवाली होने के कारण असंख्य दीपदान करते हुए श्रद्धालु अपने भाग्य के प्रशंसा की करते हैं ।
छत्तीसगढ़ के सक्ती नगर से अपने पूर्वजों की सद्गति की कामना श्रीमद् भागवत कथा संपन्न करने के बाद रामनारायण गौतम एवं श्रीमती अनीता गौतम , श्रीमती किरण गौतम बड़ी श्रद्धा से गया जी के पंडितों के द्वारा कर्मकांड संपन्न कर रहे हैं । भागवत आचार्य राजेंद्र महाराज जी के साथ श्रीमती करुणा , दीनदयाल पूर्णा देवी गबेल , पंडित शिव दुबे एवं बृजलाल देवांगन ने भी पूरे क्षेत्र का दर्शन लाभ प्राप्त किया।