बिनौधा में मनरेगा से बदली गांव की तस्वीर: बँधवा टार तालाब बना जल-संरक्षण और रोजगार का आधार


डभरा – कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के निर्देशन एवं जिला पंचायत सीईओ वासु जैन के मार्गदर्शन में सक्ती जिले के डभरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत बिनौधा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत किए गए बँधवा टार तालाब के गहरीकरण एवं पचरी निर्माण कार्य ने गाँव की तस्वीर बदल दी है। कभी पानी की भारी किल्लत से जूझने वाला यह गाँव आज जल-सुरक्षा, सिंचाई और रोजगार के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनता दिखाई दे रहा है। ग्राम बिनौधा से पूर्व दिशा में लगभग 300 मीटर दूर स्थित बँधवा टार तालाब एक समय गाँव की जीवनरेखा हुआ करता था, लेकिन वर्षों से मिट्टी भर जाने के कारण इसकी जलधारण क्षमता घट गई थी। बरसात का पानी कुछ ही दिनों में बह जाता था और गर्मी में तालाब सूख जाता था। परिणामस्वरूप किसान पूरी तरह मानसून पर निर्भर थे, कुएँ और हैंडपंप सूखने लगे थे तथा ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं को दूर-दराज़ से पानी लाना पड़ता था। इस समस्या को देखते हुए ग्राम सभा में सर्वसम्मति से तालाब गहरीकरण कार्य को प्राथमिकता दी गई। सरपंच, सचिव एवं ग्राम रोजगार सहायक के मार्गदर्शन में मनरेगा अंतर्गत बँधवा टार तालाब गहरीकरण एवं पचरी निर्माण कार्य को स्वीकृति मिली। जिसके तहत कार्य प्रारंभ किया गया, जिसमें मास्टर रोल जारी कर स्थानीय ग्रामीणों को रोजगार उपलब्ध भी कराया गया। इस कार्य में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं ने भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और 4055 मानव दिवस का सृजन हुआ, जिससे अनेक परिवारों को स्थानीय स्तर पर ही रोजगार मिला और पलायन पर रोक लगी और कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण हुआ। तालाब के गहरीकरण से वर्षा जल संग्रहण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। अब बरसात का पानी लंबे समय तक तालाब में ठहरता है, जिससे आसपास के खेतों में नमी बनी रहती है और सिंचाई की सुविधा बेहतर हुई है। सब्ज़ी उत्पादन बढ़ने से उनकी आय में भी इज़ाफा हुआ है। जलस्तर बढ़ने से गाँव के कुएँ और हैंडपंप फिर से चालू हो गए हैं। पशुपालकों को वर्षभर पानी उपलब्ध हो रहा है। इसके साथ ही तालाब गाँव के सामाजिक जीवन का केंद्र बन गया है, जहाँ लोग शाम के समय एकत्र होते हैं और बच्चे खेलते नज़र आते हैं। आज बिनौधा ग्रामवासी बँधवा टार तालाब को केवल एक जलस्रोत नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास, रोजगार और आत्मनिर्भरता का प्रतीक मानते हैं। यह पहल इस बात का उदाहरण है कि योजनाओं के सही क्रियान्वयन और जनभागीदारी से ग्रामीण भारत की तस्वीर बदली जा सकती है।


