संपूर्ण जगत में पांच आद्या शक्ति है – आचार्य राजेंद्र महाराज

सक्ती – संसार में केवल दो ही रात्रियां पौराणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है ।एक है महाशिवरात्रि जिस दिन भगवान भोलेनाथ ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे और उसी दिन से सारा संसार उन्हें लिंग स्वरूप में पूजन करते आ रहे हैं । दूसरी रात्रि है “नवरात्रि”। संपूर्ण जगत के मंगल और व्यक्ति व्यक्ति के अंतःकरण को जागृत करने के लिए नवरात्रि का उपवास और व्रत आज पूर्ण हो रहा है । शक्तिमान बनने के लिए शक्ति की आराधना करनी पड़ती है । नवरात्रि की नवमी तिथि को देवी सिद्ध रात्रि बनकर हमारे जीवन के सभी मंगल कामनाओं को और मनुष्य जीवन को सिद्ध करती हैं । आज लाई का भोग देवी में समर्पण किया जाता है ।भागवत आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने बताया कि संपूर्ण जगत में पांच आद्या शक्ति हैं , जिनका प्रमाण श्रीमद् देवी भागवत महापुराण के नवे स्कंध के पहला अध्याय के पहले श्लोक से मिलता है ।
गणेश जननी दुर्गा , राधा, लक्ष्मी: सरस्वती ।
सावित्री च सृष्टि विधौ प्रकृति: पंचधा स्मृता ।।
अर्थात देवी दुर्गा, राधा जी , लक्ष्मी जी , सरस्वती माता और सावित्री देवी , यही पांच आद्या सक्ती है । जो सबका कल्याण करती हैं । भगवान श्री राम ने भी लंका पर विजय पाने के लिए जगत जननी मैया दुर्गा की आराधना करते हुए व्रत किया था , तब नवमी तिथि को साक्षात देवी दुर्गा ने उन्हें दर्शन देकर उनके व्रत की सिद्धि प्रदान किया और लंका पर विजय प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया था ।
संपूर्ण मानव मात्र भी जीवन के संघर्षों से विजय प्राप्त करने के लिए देवी जगदंबा की आराधना केवल नवरात्रि में ही नहीं बल्कि प्रतिदिन नवार्ण मंत्र से करते रहें , सक्ती जागृत होगी , और अंत: करण देवी सक्ती से पूर्ण होकर अपने परिवार के साथ समाज और राष्ट्र के कार्य में हम अपने जीवन के महत्वपूर्ण समय लगा सकेंगे ।


