जागेश्वर सिंह राज का बड़ा सवाल

मासूम आदिवासियों को कब तक माओवादी बताकर जेल भेजती रहेगी सरकार

सक्ती – आदिवासी कांग्रेस कमेटी जिला सक्ती के जिलाध्यक्ष जागेश्वर सिंह राज ने एक गंभीर मुद्दे को उठाते हुए सरकार और समाज दोनों से कड़े सवाल पूछे हैं। उन्होंने कहा कि आखिर कब तक गरीब बेसहारा और निर्दोष आदिवासियों को माओवादी करार देकर वर्षों तक जेल में सड़ने के लिए छोड़ दिया जाएगा।
जागेश्वर सिंह राज ने हाल ही में सामने आए एक मामले का जिक्र करते हुए कहा कि एक महिला को बिना ठोस सबूत और गवाह के 12 वर्षों तक जेल में रखा गया। यह घटना केवल एक व्यक्ति की नहीं बल्कि पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े करती है। उन्होंने कहा कि अगर किसी के खिलाफ न सबूत हो न गवाह हो फिर भी उसे जेल भेज दिया जाए तो यह न्याय व्यवस्था पर सीधा आघात है।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि क्या गरीब और आदिवासी होना ही आज सबसे बड़ा अपराध बन गया है क्या उनके पास मजबूत वकील और संसाधन नहीं होने के कारण उन्हें आसानी से फंसा दिया जाता है जागेश्वर सिंह राज ने कहा कि जिन लोगों के पास अपनी आवाज उठाने का साधन नहीं होता वही सबसे ज्यादा अन्याय का शिकार होते हैं।
जिलाध्यक्ष ने समाज से भी अपील करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में केवल सरकार को दोष देना पर्याप्त नहीं है बल्कि समाज को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। उन्होंने कहा कि जब तक हम सभी मिलकर अन्याय के खिलाफ आवाज नहीं उठाएंगे तब तक निर्दोष लोग इसी तरह पीड़ित होते रहेंगे।
उन्होंने आगे कहा कि यह केवल कानूनी मुद्दा नहीं है बल्कि मानवता और संवेदनशीलता का भी प्रश्न है। क्या किसी निर्दोष व्यक्ति के जीवन के 10-12 साल वापस लौटाए जा सकते हैं क्या सरकार इस नुकसान की भरपाई कर सकती है
जागेश्वर सिंह राज ने मांग की कि ऐसे मामलों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जिन अधिकारियों की लापरवाही या गलत कार्रवाई के कारण निर्दोष लोगों को जेल जाना पड़ा उनके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही पीड़ितों को उचित मुआवजा और सम्मान के साथ पुनर्वास दिया जाना चाहिए।
अंत में उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि सरकार और समाज दोनों मिलकर यह सुनिश्चित करें कि किसी भी गरीब आदिवासी या बेसहारा व्यक्ति के साथ इस तरह का अन्याय दोबारा न हो। न्याय केवल अदालतों में नहीं बल्कि व्यवस्था और समाज की सोच में भी दिखना चाहिए।


