सक्ती

देर रात्रि 1.45 के बाद   हुआ होलिका दहन

देर रात्रि 1.45 के बाद   हुआ होलिका दहन kshititech

सक्ती –  हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा पर 2 मार्च, सोमवार को देर रात्रि में शुभ मुहूर्त में होलिका दहन किया गया । रात्रि 1:45 के बाद विद्वान पंडित राधेश्याम शर्मा के द्वारा विधि विधान से होलिका का पूजन किया गया  भक्त प्रहलाद की जय घोष के बाद होलिका दहन किया गया, शहर में हटरी चौक में, अग्रसेन चौक के पास, स्टेशन के पास होलिका दहन किया गया, शहर के अग्रवाल बंधु अधिक संख्या में उपस्थित होकर पूजा अर्चना किए,वहीं 3 मार्च, मंगलवार को चंद्रग्रहण होने के कारण रंगों का त्योहार  4 मार्च, बुधवार को होली खेली -जाएगी। होली त्यौहार को लेकर जिला  पुलिस की पैनी नजर बनी हुई है , 24 घंटे पुलिस द्वारा लगातार पेट्रोलिंग की जा रही है, चौक चौराहे पर पुलिस बल तैनात है।
होलिका दहन की कथा पुराणों के अनुसार, हिरण्यकशिपु राजा भगवान विष्णु का सबसे बड़ा शत्रु माना जाता था। उसने अपने राज्य में सभी को यह आदेश किया था कि कोई भी ईश्वर की पूजा नहीं करेगा। लेकिन उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। जब हिरण्यकशिपु ने अपने पुत्र को भगवान की पूजा करते हुए देखा तो उसने अपने ही पुत्र को दंड देने की ठान ली। हिरण्यकशिपु ने प्रहलाद को कई बार कष्ट देना चाहा, लेकिन भगवान विष्णु ने हर समय प्रहलाद का साथ दिया।अंत में अत्याचारी राजा ने अपनी बहन होलिका से मदद मांगी। होलिका को यह वरदान था कि उसे अग्नि नहीं जला सकती है। इसलिए होलिका प्रहलाद को अपनी गोद में लेकर अग्नि में प्रवेश कर गई। लेकिन भगवान विष्णु की कृपा से होलिका उस अग्नि में भस्म हो गई और प्रहलाद बच गया। तब से होलिका दहन पर्व को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है।