कोटमी सोनार किले की खाई में रहते हैं मगरमच्छ

जांजगीर-चांपा – मगरमच्छों को आमतौर पर झीलों और नदियों में देखा जाता है, लेकिन छत्तीसगढ़ में एक ऐसा अनोखा गांव है जहां मगरमच्छ गलियों में आज़ादी से घूमते हैं और इंसान बिना किसी डर के उनके पास से गुजरते हैं।
यह नजारा देखने को मिलता है छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के कोटमी सोनार गांव, जहां इंसानों और मगरमच्छों के बीच एक अनोखा रिश्ता देखने को मिलता है। प्राचीन ग्रंथों में वर्णित कोटमी सोनार किला एक ‘मृदा दुर्ग ‘ (मिट्टी का किला) है, जिसकी पहचान मिट्टी की प्राचीरों (चहारदीवारी ) और चारों ओर खाई (खंदक) से होती है। परंतु यह किला अब खंडहर हो चुका है।
अशासकीय विद्यालय प्रबंधक कल्याण संघ के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल को आज क्रोकोडायल पार्क के भ्रमण के दरमियान स्थानीय लोगों ने चर्चा में बताया कि ये मगरमच्छ उनके जीवन का हिस्सा बन चुके हैं तथा बच्चे, बूढ़े, महिलाएं सभी इन मगरमच्छों के बीच निर्भीक होकर रहते हैं। इस गांव की खास बात यह है कि यहां 400 से ज्यादा मगरमच्छ खुले आसमान के नीचे रहते हैं,और वो भी गांव के बीचो_बीच स्थित एक खाईनुमा झील में ये मगरमच्छ कई दशकों से रह रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि अब तक किसी इंसान पर मगरमच्छ ने हमला नहीं किया और न ही इंसानों ने कभी उन्हें नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने आगे बताता कि वर्तमान में वन विभाग के संरक्षण में संचालित मॉर्डन क्रोकोडायल पार्क देश का दूसरा सबसे बड़ा क्रोको डायल पार्क के रूप में विख्यात है वहां प्रतिदिन सुदूर अंचलों से स्कूली विद्यार्थी एवं जिज्ञासु लोगों प्रतिदिन भ्रमण पर आते हैं तथा वनविभाग के नियमानुसार शुल्क देकर क्रोकोडायल पार्क का दर्शन करते हैं। पास ही मानव सेवा आश्रम हैं जहां हर रविवार को लोग अपनी ज्ञात अज्ञात समस्याओं के समाधान के लिए पहुंचते हैं तथा राहत प्राप्त करते हैं।


