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ग्रामीण आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास से केवट मछुआ सहकारी समिति बनी सशक्त उदाहरण

डभरा – ग्रामीण आत्मनिर्भरता और सामूहिक प्रयास से विकासखण्ड डभरा अंतर्गत ग्राम पंचायत सुखदा में स्थित केवट मछुआ सहकारी समिति सशक्त उदाहरण बनी चुकी है। यह समिति सीमित संसाधनों के बावजूद सुनियोजित योजना और सतत परिश्रम के बल पर मत्स्य पालन के क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता अर्जित कर रही है। वर्ष 2023 में समिति को ग्राम पंचायत सुखदा में 7.904 हेक्टेयर जलक्षेत्र का तालाब आवंटित किया गया। इसके बाद वर्ष 2024 में जनपद पंचायत डभरा द्वारा 21.515 हेक्टेयर का सिंचाई जलाशय 10 वर्षीय पट्टे पर समिति को प्रदान किया गया। इस आवंटन ने समिति के कार्यक्षेत्र को विस्तारित किया और मत्स्य पालन को संगठित एवं बड़े स्तर पर संचालित करने का अवसर दिया। आवंटित जलक्षेत्र में समिति द्वारा मत्स्य बीज संचयन कर वैज्ञानिक एवं व्यवस्थित तरीके से मछली पालन का कार्य प्रारंभ किया गया। नियमित देखरेख, संतुलित आहार प्रबंधन और सामूहिक श्रम के परिणामस्वरूप समिति प्रतिवर्ष लगभग 6000 किलोग्राम से 7000 किलोग्राम तक मछली उत्पादन कर रही है। उत्पादन में निरंतर वृद्धि समिति की कार्यप्रणाली की सफलता को दर्शाती है। मछली उत्पादन से समिति को प्रतिवर्ष लगभग 6 से 7 लाख रुपये की आय अर्जित हो रही है। यह आय न केवल समिति के सदस्यों की आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना रही है, बल्कि ग्राम स्तर पर रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर भी सृजित कर रही है। केवट मछुआ सहकारी समिति की यह सफलता दर्शाती है कि यदि योजनाओं का लाभ पारदर्शिता, समर्पण और सामूहिक सहभागिता के साथ लिया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों में भी सतत आजीविका के मजबूत आधार तैयार किए जा सकते हैं। यह पहल अन्य ग्रामीण समितियों के लिए भी प्रेरणास्रोत बनकर उभर रही है और आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में सार्थक कदम साबित हो रही है।