सक्ती

“ग्रामीण महिला सशक्तिकरण” पर शोध प्रो. मथुरा महिलांगे को पीएचडी उपाधि, शिक्षा जगत में नया गौरव

"ग्रामीण महिला सशक्तिकरण" पर शोध प्रो. मथुरा महिलांगे को पीएचडी उपाधि, शिक्षा जगत में नया गौरव kshititech

सक्ती –  ज्ञान, तप और सतत प्रयास जब संगठित होकर फलित होते हैं, तब एक साधक का समर्पण समाज के सम्मुख प्रेरणा का शाश्वत उदाहरण बनता है। समाजशास्त्र के क्षेत्र में निरंतर अध्ययन, संवाद व अनुसंधान की साधना में रत मथुरा महिलांगे माहेश्वरी ने इसी सत्य को सिद्ध किया है। अटल बिहारी वाजपेयी विश्वविद्यालय, बिलासपुर द्वारा उन्हें डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) की उपाधि प्रदान किए जाने के साथ ही इस उपलब्धि ने न केवल उनके व्यक्तिगत जीवन में गौरव की ज्योति प्रज्वलित की है, बल्कि प्रदेश की शैक्षणिक चेतना में भी एक नया अध्याय जोड़ा है। सक्ती जिले के ग्राम फरसवानी-डभरा में जन्मी व पली-बढ़ी प्रो.महिलांगे, पिताम्बर महिलांगे एवं शांति देवी की ज्येष्ठ पुत्री हैं। वर्तमान में वे शासकीय वेदराम महाविद्यालय, मालखरौदा में अपने शिक्षकीय दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन कर रही हैं। ग्रामीण जीवन, महिला विकास एवं सामाजिक संरचना के अंतर्संबंधों पर उनका शोध अत्यंत महत्त्वपूर्ण व समयानुकूल माना जा रहा है। “ग्रामीण महिलाओं का सशक्तिकरण छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले के ग्रामीण संदर्भ में एक समाजशास्त्रीय अध्ययन” शीर्षक पर आधारित यह शोध आज की ग्रामीण स्त्री की वास्तविक स्थिति, चुनौतियों व उन्नति के मार्गों पर गंभीर विमर्श प्रस्तुत करता है। इस शोध कार्य के निर्देशन में डॉ. साधना सोम विभागाध्यक्ष, समाजशास्त्र डीपी.विप्र. महाविद्यालय, बिलासपुर, सह-निर्देशक डॉ. के.पी. कुर्रे, डॉ. महेश पाण्डेय सहित अनेक शिक्षकों व सहकर्मियों का बहुमूल्य मार्गदर्शन रहा। उपलब्धि के इस क्षण पर प्रो. महिलांगे ने अपने सभी सहयोगियों, शिक्षकों व परिवार के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए कहा कि यह सफलता सामूहिक समर्थन और विश्वास के फलस्वरूप ही संभव हुई है।उनकी यह उपलब्धि न केवल जांजगीर-चांपा अथवा सक्ती जिले के लिए गौरव का विषय है, बल्कि उन सभी छात्र-छात्राओं हेतु प्रेरणा है जो ज्ञान और शोध के पथ पर अडिग रहते हुए समाज व देश के लिए उपयोगी दृष्टि विकसित करने का संकल्प रखते हैं।