घिवरा स्कूल में विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी, पढ़ाई नहीं होने से 282 बच्चों के भविष्य खतरे में

जैजैपुर – छत्तीसगढ़ में विष्णु देव साय की सरकार और केंद्र में नरेंद्र मोदी की डबल इंजन की सरकार शिक्षा के क्षेत्र में पानी की तरह पैसे बहा रही है। शासकीय स्कूलों में कक्षा पहली से 12वीं तक की छात्र और छात्राएं को निशुल्क शिक्षा दे रही है। छत्तीसगढ़ की सरकार सभी शासकीय स्कूलों में कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों को निशुल्क मध्यान भोजन भी दे रही है। कक्षा पहली से लेकर दसवीं तक के बच्चों को निशुल्क पुस्तक दे रही है। इसके साथ ही कक्षा पहली से लेकर आठवीं तक के बच्चों को निशुल्क गणवेस भी दे रही है। इसके अतिरिक्त कक्षा नौवीं के बालिकाओं को सरस्वती साइकिल योजना के तहत निशुल्क साइकिल भी दे रही है। ताकि ग्रामीण इलाकों के बच्चों को अपने विद्यालय आने एवं जाने में सहूलियत हो। गरीब एवं असहाय परिवार के बच्चों को शिक्षा की मुख्य धारा से जोड़ा जा सके। लेकिन विकासखंड जैजैपुर के अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घिवरा में यह सब खोखला साबित हो रही है। यहां पिछले कई सालों से शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई नहीं हो रही है। लेकिन यहां पर पदस्थ जिम्मेदार प्राचार्य लक्ष्मी नारायण डड़सेना इस दिशा में बिल्कुल भी ध्यान नहीं दे रहे हैं। लिहाजा यहां पर अध्यनरत 282 बच्चों के भविष्य खतरे में पड़ गया है।
डी. एन. देवांगन बिर्रा । शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घिवरा में विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई नहीं हो रही है। लेकिन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घिवरा के प्राचार्य लक्ष्मी नारायण डड़सेना के अनुसार पढ़ाई जैसे तैसे भगवान भरोसे हो रही है। इधर परीक्षा सिर के ऊपर होने से बच्चों का भविष्य अंधकार मय लग रहा है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घिवरा में अध्यनरत 282 बच्चों को पढ़ाई नहीं होने के कारण भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां पर अध्यनरत बच्चों का भविष्य खतरे में पड़ गया है।
गौरतलब है कि सक्ती जिला के विकासखंड जैजैपुर के अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घिवरा में कक्षा 9वीं से लेकर 12वीं तक पढ़ाई कर रहे 282 बच्चों का भविष्य पढ़ाई नहीं होने से अंधकार मय लग रहा है। यहां पर विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी से पढ़ाई नहीं होने से छात्र-छात्राओं को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में ग्रामीणों ने बताया कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घिवरा विकासखंड जैजैपुर में भौतिक, हिंदी ,संस्कृत, राजनीति और इतिहास विषय की विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई नहीं हो रही है। जैसे तैसे भगवान भरोसे पढ़ाई की औपचारिकता हो रही है। इधर परीक्षा सिर के ऊपर होने से बच्चों का भविष्य अंधकार मय लग रहा है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घिवरा में अध्यनरत 282 बच्चों को पढ़ाई नहीं होने के कारण मानसिक रूप से भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिम्मेदार शिक्षा विभाग के जिला के वरिष्ठ अधिकारी हाथ पर हाथ धरे कुर्सी में बैठकर कार्यालय की सोभा बढ़ा रहे हैं। यहां पर शिक्षक नियुक्त करने में शिक्षा विभाग के अधिकारी रुचि नहीं ले रहे हैं। लिहाजा गांव में ही शिक्षा प्राप्त करने गरीब परिवार के बच्चे मजबूर हो रहे हैं। दूसरे शहरों में दूर जाकर गरीब बच्चे पढ़ाई नहीं कर सकते हैं। गांव में ही विद्यालय खुल जाने से गरीब परिवार के बच्चों में आस जगी थी कि गांव में ही रहकर हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूल स्तर का शिक्षा मिल सके। लेकिन यहां सब कुछ उल्टा पुल्टा चल रहा है। गांव के गरीब परिवार के बच्चे उनके आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रहने से दूसरे शहरों में जाकर पढ़ाई करने में असमर्थ हैं। लेकिन उच्च परिवार के बच्चे दूसरों शहरों में जाकर पढ़ाई कर रहे हैं। लिहाजा गांव में पढ़ने वाले गरीब परिवार के बच्चों को अपने विद्यालय में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई नहीं होने से बेवजह भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घिवरा के प्राचार्य और शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों इस दिशा में पहल करने में कोई सरोकार नहीं कर रहें हैं। यहां पर पदस्थ प्राचार्य लक्ष्मी नारायण डड़सेना का घोर लापरवाही कार्य की प्रति उदासीनता और स्वेच्छा चारिता चरम सीमा के सातवें आसमान पर है। यह बात आसपास के गांवों में चर्चा का विषय बना हुआ है। बहरहाल कारण चाहे जो भी हो लेकिन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय घिवरा में विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी के कारण पढ़ाई नहीं होने से बेवजह बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। यहां पर अध्यनरत 282 बच्चों का भविष्य खतरे में है।
नहीं किए हैं पत्राचार
इस वर्ष युक्तियुक्तकरण में विशेषज्ञ शिक्षकों की पदस्थापना हो जाएगा । ऐसा सोचकर उच्च कार्यालय को पत्राचार नहीं किया हूं।


