सक्ती

मेरा परिवार – मेरी ताकत”
मजबूत समाज व मजबूत राष्ट्र की नींव

रायपुर – पविवेकानन्द केंद्र एवं सुहिणी सोच के संयुक्त तत्वावधान में वृंदावन हाल में “मेरा परिवार – मेरी ताकत” विषय पर एक प्रेरणादायी विमर्श कार्यक्रम का आयोजन संपन्न हुआ। इस  कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन कर,राष्ट्रगीत से हुआ। मेरा परिवार मेरी ताकत इस महत्वपूर्ण विषय पर परिवार, संस्था, जीवन‑मूल्य, भारतीय संस्कृति तथा वसुधैव कुटुम्बकम की भावना पर विस्तृत चर्चा हुई।कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राकेश चतुर्वेदी ने कहा कि मजबूत परिवार ही मजबूत समाज और मजबूत राष्ट्र की नींव है, उन्होंने वर्तमान समय में परिवारों में घटते संवाद, बढ़ती आपाधापी और तकनीकी व्यस्तता के बीच आपसी विश्वास, समय और संवेदना को वापस घर‑घर पहुँचाने की आवश्यकता पर बल दिया।उन्होंने कहा कि “मेरा परिवार – मेरी ताकत” केवल नारा नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक दिशा है, जहाँ हर सदस्य एक‑दूसरे के सुख‑दुःख में साझेदार बनता है।राकेश  चतुर्वेदी ने युवाओं से आग्रह किया कि वे बुजुर्गों के अनुभव और बच्चों की मासूमियत के बीच सेतु बनकर परिवार में सकारात्मक वातावरण तैयार करें। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता  पद्मश्री सुश्री निवेदिता  रघुनाथ भिड़े, अखिल भारतीय उपाध्यक्ष, विवेकानंद केंद्र, कन्याकुमारी ने “अमृत परिवार, जीवन मूल्य एवं मनुष्य‑प्रकृति‑ईश्वर” विषय पर अपना मार्गदर्शी उदबोधन दिया,साथ ही उन्होंने बताया कि प्रकृति ईश्वर का प्रत्यक्ष रूप है और मनुष्य, परिवार, समाज, राष्ट्र एवं विश्व – सब एक विस्तारित परिवार के अंग हैं, जिसे भारतीय परंपरा “वसुधैव कुटुम्बकम्” कहती है।उन्होंने श्रीराम और स्वामी विवेकानन्द के जीवन‑उदाहरण देते हुए कहा कि जब दृष्टि केवल अपने घर तक सीमित न रहकर पूरे समाज और विश्व को परिवार मानती है, तभी मनुष्य “मर्यादा‑पुरुषोत्तम” और “जगत‑गुरु” जैसी ऊँचाइयों तक पहुँचता है।संत तिरुवल्लुवर के संदर्भ से धर्म‑अर्थ‑काम‑मोक्ष की व्याख्या करते हुए उन्होंने धर्म को आत्मीय व्यवहार, विस्तारित कर्तव्यबोध, संवेदनशीलता और त्याग का नाम बताया।परिवार एवं जीवन‑मूल्यों पर संदेश देते हुए निवेदिता भिदे ने गृहस्थ आश्रम को सभी आश्रमों की आधारशिला बताते हुए कहा कि जितना परिवार बिखरता है, उतनी ही आत्मशक्ति कमजोर होती जाती है। उन्होंने वैचारिक आक्रमणों के इस समय में भारतीय जीवन‑मूल्यों के संस्थानीकरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए अमृत परिवार जैसे कार्यक्रमों को समय की मांग बताया।उन्होंने “अमृत प्रार्थना, अमृत प्रभात, अमृत भोजन और अमृत शयन” जैसे दैनिक उपक्रम सुझाए, जिनके माध्यम से ईश्वर‑स्मरण, सकारात्मक संकल्प और सामूहिक पारिवारिक साधना को जीवन का हिस्सा बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमारी समृद्ध भाषा, जो हर रिश्ते के लिए अलग‑अलग शब्द देती है, हमारी सांस्कृतिक पूँजी है और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना सबकी साझा जिम्मेदारी है। विवेकानंद केंद्र के नगर संचालक सी ए चेतन तरवानी जी ने बताया कि कैसे एक महिला परिवार के साथ व सहयोग से आगे बढ़ सकती है, सुहिणी सोच की फाउंडर मनीषा तारवानी जी ने बताया की परिवार हो तो तारवानी परिवार जैसा,जहां पूरे परिवार में ,सभी भाइयों में एकता है,प्यार है।पूरे परिवार का साथ व प्यार   हमे मजबूत बनाता है,अपने परिवार में एकता  हो,यही जिंदगी की असली कमाई है। साथ ही सुहिणी सोच की अध्यक्ष पल्लवी चिमनानी  ने कहा, कि परिवार से ही एक बच्चा  संस्कार प्राप्त कर अपना आगे का भविष्य तय करता है।
इस  कार्यक्रम में विभिन्न आयु‑वर्ग के प्रतिभागियों ने “मेरा परिवार – मेरी ताकत” विषय पर अपने अनुभव और विचार साझा किए।साथ ही अपनी शंकाओं का समाधान भी प्राप्त किया। अंत में प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि वे अपने‑अपने घरों में संवाद, संस्कार और संवेदना पर आधारित परिवार‑व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस प्रयास करेंगे।कार्यक्रम के अंत में सभी का धन्यवाद ज्ञापन किया सुहिणी सोच की सचिव रेणु कृष्णानी ने।कार्यक्रम का संचालन मनीषा गर्ग ने किया।इस कार्यक्रम में डॉ.इला गुप्ता ,भीमानदास तारवानी,उत्तमचंद तारवानी,लक्ष्मीचंद गुलवानी,डॉ.मनोहर लाल लहेजा आदि गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित थे।