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शिक्षा में नई रोशनी: शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला छितापंडरिया के विद्यार्थियों को मिला गणित का नया शिक्षक

सक्ती – शासन की युक्तियुक्तकरण पहल से शिक्षा व्यवस्था को नई मजबूती मिल रही है। प्रदेश सरकार की युक्तियुक्तकरण नीति का उद्देश्य शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। इस नीति के अंतर्गत शालाओं और शिक्षकों का समुचित समायोजन कर उन विद्यालयों तक शिक्षक पहुँचाए जा रहे हैं, जहां वर्षों से नियमित शिक्षक नहीं थे। शासन द्वारा शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण के तहत की जा रही पदस्थापना प्रक्रिया का लाभ अब ग्रामीण अंचलों में भी साफ़ तौर पर दिखाई देने लगा है। इसी कड़ी में शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला छितापंडरिया में लंबे समय से चली आ रही शिक्षकीय कमी को दूर करते हुए गणित विषय के लिए शिक्षक श्री डोमन लाल देवांगन की पदस्थापना की गई है। प्रधानपाठक से प्राप्त जानकारी अनुसार विद्यालय में वर्तमान में कुल 69 छात्र-छात्राएँ कक्षा 6वीं, 7वीं और 8वीं में अध्ययनरत हैं। अब तक यह शाला केवल एकल शिक्षकीय थी, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। लेकिन अब शिक्षक संख्या बढ़ जाने से पढ़ाई पर सकारात्मक असर दिखाई देने लगा है। यह बदलाव बच्चों को व्यक्तिगत ध्यान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिलाने में सहायक साबित हो रहा है। शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला छितापंडरिया के प्रधानपाठक ने बताया कि हमारा स्कूल पिछले कुछ वर्षों से एकल शिक्षकीय शाला था। जिससे छात्र-छात्राओं को उचित शिक्षा नही मिल पा रही थी। लेकिन अब मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के द्वारा युक्तियुक्तकरण की योजना लाई गई जिसके तहत हमारे विद्यालय में एक और शिक्षक की नियुक्ति हुई है। जिससे शाला में शिक्षा व्यवस्था मजबूत हूई है। इससे शिक्षण प्रदान करने में जो कमियां थी उसमें वृद्धि हो रही है। साथ ही शासकीय पूर्व माध्यमिक शाला छितापंडरिया में गणित विषय के नये शिक्षक की नियुक्ति से एक नई आश जगी है। गणित विषय के शिक्षक की नियमित उपस्थिति से बच्चों का मन पढ़ाई में लगने लगा है और वे समय से शाला पहुँचने लगे हैं। बच्चों में अध्ययन के प्रति उत्साह और रुचि स्पष्ट रूप से बढ़ रही है। राज्य शासन की यह पहल न केवल ग्रामीण शिक्षा को मजबूती दे रही है, बल्कि विद्यार्थियों के शैक्षणिक भविष्य को भी नई दिशा प्रदान कर रही है।