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सक्ती

भगवान शिव जी में राम नाम अंकित बेलपत्र चढ़ाने से 3 जन्मों के पापों का होता है नाश – आचार्य राजेंद्र जी महाराज

भगवान शिव जी में राम नाम अंकित बेलपत्र चढ़ाने से 3 जन्मों के पापों का होता है नाश - आचार्य राजेंद्र जी महाराज kshititech

सक्ती नगर में देवांगन परिवार के द्वारा कराया जा रहा है सप्त दिवसीय महामृत्युंजय यज्ञ अनुष्ठान

सक्ती ‌‌। श्रावण मास में भगवान शिवजी की पूजा अर्चना बड़ी कल्याणकारी , शुभ फलदायक होती है। देवशयनी एकादशी के उपरांत भगवान नारायण क्षीर सागर में लंबी निद्रा में चले जाते हैं तब संपूर्ण विश्व के कल्याण का दायित्व भगवान शिव जी पर होता है ।

शिव का अर्थ ही कल्याण होता है , अर्थात भगवान भोलेनाथ स्वयं कल्याण स्वरुप है , इन पर बिल्वपत्र , शमी पत्र , श्वेत कमल , धतूरा तथा आक के पत्र पुष्प चढ़ाने का विशेष महत्व है । वही भगवान शिव जी का रुद्राभिषेक दूध , जल और पंचामृत आदि से करने से पुण्य फल की प्राप्ति तथा मनोकामनाएं सिद्ध होती हैं ।

सक्ती में देवेंद्र प्रसाद देवांगन संचालक हंसमुख क्लॉथ , सोसायटी चौक के यहां आयोजित सप्त दिवसीय महामृत्युंजय यज्ञ अनुष्ठान में आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने बताया की भगवान शिव जी में राम नाम अंकित कर बेलपत्र चढ़ाने से 3 जन्मों के पापों का नाश होता है और कन्यादान जैसा पुण्य फल प्राप्त करते हैं । किसी व्यक्ति को बुरे और भयानक डरावने सपने आने पर भगवान शिव में शमी पत्र व पंचाक्षर मंत्र ओम नमः शिवाय कह कर समर्पित करने से बुरे सपने आने बंद हो जाते हैं ।

भगवान शिव तो कालजई है वह अकाल मृत्यु को दूर करते हैं और हमारे जीवन में सुख समृद्धि का पुण्य फल प्रदान करते हैं । संपूर्ण विश्व के कल्याण करने के लिए वे स्वयं हलाहल जैसे विष का पान कर लेते हैं और सब को अमृत भी पिलाते हैं । भगवान शिव के दरबार में किसी को भी प्रवेश करने की मनाही नहीं है , भूत – प्रेत ,मसान भी इन के दरबार में रहते हैं । संसार में केवल एक ही भगवान भोलेनाथ के पूरे परिवार की पूजा होती है अन्य किसी देवी देवता के परिवार की नहीं । शिव परिवार में समरसता के भाव भी दिखते हैं , इनमें सभी के वाहन अलग अलग तथा विषम भाव वाले होकर के भी एक साथ रहते हैं । शिव परिवार में यह समरसता का भाव हम सबके लिए बड़े अनुकरणीय हैं । शिव सत्य है शाश्वत हैं और परम सुंदर हैं , और यही राम नाम के आदि आचार्य हैं , जो श्री राम को अपना ईस्ट मानते हैं और राम नाम से अति प्रेम होने के कारण ही इस मसान घाट में किसी व्यक्ति के जले हुए शरीर के राख को भी अपने शरीर में लगा लेते हैं । इसीलिए इन्हें देव नहीं बल्कि हम सब महादेव कहते हैं ।

आयोजित यज्ञ में विद्वान आचार्यों के द्वारा वेद मंत्रोच्चार के साथ वेदी पूजन एवं रुद्राभिषेक संपन्न कराए जा रहे हैं । वही आचार्य देव कृष्ण जी महाराज के मधुर संगीत और शिव भक्ति के कर्णप्रिय भजन से श्रोताओं को आनंद की प्राप्ति हो रही है ।